आज पूरे विश्व को दिगंबर अखाड़े की महामंडलेश्वर साध्वी सती माता मीरा बाईसा जैसे सिद्ध, तपस्वी संतों की जरूरत: श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज
इस धार्मिक आयोजन में देशभर से आए संतों, महंतों और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान भक्तमाल कथा, संत समागम और विशेष प्रवचन का आयोजन किया गया। वातावरण भक्तिमय रहा और श्रद्धालुओं ने संतों के दर्शन कर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया।
मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज
शुक्रवार को सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर, जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय प्रवक्ता एवं दिल्ली संत महामंडल के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शामिल हुए।
आश्रम पहुंचने पर संतों और श्रद्धालुओं द्वारा महाराजश्री का श्रद्धापूर्वक स्वागत-अभिनंदन किया गया। बड़ी संख्या में उपस्थित भक्तों ने उनसे आशीर्वाद लिया। इसके बाद आयोजित संत समागम और विशेष प्रवचन में महाराजश्री ने संत परंपरा तथा मानव सेवा के महत्व पर विस्तार से विचार रखे।
“आज देश ही नहीं, पूरे विश्व को दिगंबर अखाड़े की महामंडलेश्वर साध्वी सती माता मीरा बाईसा जैसे सिद्ध और तपस्वी संतों की आवश्यकता है, जो मानवता को प्रेम, करुणा, अहिंसा, शांति और बंधुत्व का मार्ग दिखा सकें।”
साध्वी सती माता मीरा बाईसा का जीवन प्रेरणास्रोत
श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि महामंडलेश्वर साध्वी सती माता मीरा बाईसा का जीवन केवल आम लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि संत समाज के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन सनातन धर्म, भारतीय संस्कृति, शिक्षा, परंपरा, विरासत, भगवत भक्ति, संत सेवा और मानव सेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण प्रस्तुत करता है।
उन्होंने कहा कि नर सेवा को नारायण सेवा मानकर मानवता की सेवा करना भगवान की सच्ची भक्ति का एक महत्वपूर्ण स्वरूप है। संतों का जीवन समाज को यह संदेश देता है कि आध्यात्मिक साधना के साथ-साथ मानव कल्याण के लिए कार्य करना भी आवश्यक है।
संतों की वाणी से मिलता है सत्य और भक्ति का मार्ग
श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने कहा कि संतों का जीवन समाज को सत्य, सेवा, सद्भाव और भक्ति का मार्ग दिखाता है। भक्तमाल में वर्णित संतों और भक्तों का चरित्र केवल सुनने के लिए कथा नहीं, बल्कि मानव जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा है।
उन्होंने कहा कि संतों की वाणी को अपने जीवन में उतारना ही वास्तविक भक्ति है। संतों के मार्गदर्शन और सत्संग के माध्यम से व्यक्ति अपने जीवन में सदाचार, सेवा और आध्यात्मिक चेतना को विकसित कर सकता है।
भक्तमाल कथा में संतों और भक्तों के चरित्र का वर्णन
कथा वाचक संत रामदास महाराज ने भक्तमाल की कथा सुनाते हुए श्रद्धालुओं को संतों और भक्तों के जीवन चरित्र से परिचित कराया। उन्होंने भक्ति, गुरु सेवा और संत संगति के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गुरु के मार्गदर्शन और संतों की संगति से व्यक्ति धर्म तथा सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ सकता है।
अनेक संतों ने दिया आशीर्वाद
संत सम्मेलन में कई संत-महात्माओं ने श्रद्धालुओं को आशीर्वाद प्रदान किया और धर्म, भक्ति तथा गुरु परंपरा के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया।
ओजस्वी अंदाज में हुआ मंच संचालन
कार्यक्रम का मंच संचालन राजस्थान के सुप्रसिद्ध कवि नवरत्न सोनी ने अपनी ओजस्वी एवं काव्यात्मक शैली में किया। उनके प्रभावशाली संचालन ने आयोजन को और अधिक जीवंत बना दिया। सत्संग और संतों के प्रवचनों के बाद श्रद्धालुओं के लिए भोजन-प्रसादी की व्यवस्था भी की गई, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
एक महीने तक चल रहा है विशाल धार्मिक आयोजन
आयोजकों के अनुसार परम साध्वी सती माता मीरा बाईसा के आनंद महोत्सव के उपलक्ष्य में पहली बार एक महीने का विशाल धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। इस दौरान विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम, संत समागम, सत्संग, कथा और आध्यात्मिक गतिविधियों का आयोजन किया जा रहा है।
📅 आयोजन की प्रमुख तिथियां
20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसादी
आयोजकों के अनुसार उत्तराधिकारी की चादर प्रदान किए जाने के बाद विशाल महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। इसमें 20 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। इसके लिए व्यापक व्यवस्थाएं की जा रही हैं।
🙏 संत परंपरा और मानवता का संदेश
शिवगंज में आयोजित यह संत समागम धर्म, भक्ति, गुरु सेवा, मानव सेवा और सनातन संस्कृति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम बन रहा है। संतों के विचार श्रद्धालुओं को सेवा, सद्भाव और आध्यात्मिक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा दे रहे हैं।
