बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का बंगाल में बड़ा बयान | Vardat News
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बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का बंगाल में बड़ा बयान: धर्मांतरण, घर वापसी और रघुवर को लेकर कही बड़ी बात

बाबा बागेश्वर ने पश्चिम बंगाल में गीता पाठ के दौरान धर्मांतरण, घर वापसी, हिंदू संस्कृति और देश की पहचान को लेकर कई बड़े बयान दिए।

✍️ रिपोर्ट: Vardat News
📰 श्रेणी: राष्ट्रीय समाचार
📍 स्थान: पश्चिम बंगाल
बड़ी खबर: बागेश्वर धाम के प्रमुख पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों पश्चिम बंगाल में धार्मिक कार्यक्रम और गीता पाठ को लेकर चर्चा में हैं। इस दौरान उन्होंने धर्मांतरण और घर वापसी को लेकर बड़ा दावा किया है।

कोलकाता/पश्चिम बंगाल। बागेश्वर धाम के प्रमुख पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों पश्चिम बंगाल में गीता पाठ और धार्मिक कार्यक्रमों को लेकर चर्चा में हैं। पश्चिम बंगाल में आयोजित कथा और सत्संग के दौरान उन्होंने धर्मांतरण, घर वापसी, हिंदू संस्कृति और देश की पहचान को लेकर कई तीखे बयान दिए।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में अब तक जितना धर्मांतरण हुआ है, उन लोगों की दोबारा घर वापसी होगी। उन्होंने हिंदू समाज को अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहने का संदेश भी दिया। इसी दौरान उन्होंने देश की पहचान को लेकर कहा कि “यह देश अकबर का नहीं, रघुवर का है।”

धर्मांतरण और घर वापसी पर बड़ा दावा

कथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों का धर्मांतरण हुआ है, उनकी फिर से घर वापसी की जाएगी। उनके इस बयान ने धर्मांतरण और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।

उन्होंने कहा कि देश की संस्कृति और परंपराओं को मजबूत करने की आवश्यकता है। उनके मुताबिक आने वाले समय में धार्मिक और सांस्कृतिक चेतना को और मजबूती मिलेगी। हालांकि, उनके इन दावों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।

मुख्य बात

धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण का दावा करते हुए घर वापसी की बात कही और धार्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने पर जोर दिया।

“यह देश अकबर का नहीं, रघुवर का है”

धीरेंद्र शास्त्री ने अपने संबोधन में मुगल शासक अकबर और भगवान श्रीराम के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले नाम रघुवर का जिक्र करते हुए कहा कि देश की पहचान उसकी सनातन संस्कृति से है।

“ये देश अकबर का नहीं, रघुवर का है।”

— धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

उन्होंने आगे कहा कि एक समय यहां एक खास नाम से निर्माण और पहचान की बातें होती थीं, लेकिन अब जो भी बनेगा वह रघुवर के नाम से बनेगा।

उनका यह बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चाओं में भी सुर्खियां बटोर रहा है। समर्थकों ने इसे हिंदू संस्कृति और धार्मिक पहचान से जोड़कर देखा, जबकि विरोधी इसे राजनीतिक बयानबाजी के रूप में देख सकते हैं।

“कहते थे तुम्हें घुसने नहीं दिया जाएगा”

पश्चिम बंगाल में अपनी मौजूदगी को लेकर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि कुछ लोग दावा करते थे कि उन्हें बंगाल में प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वह पश्चिम बंगाल पहुंचे और धार्मिक कार्यक्रम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उन्हें नए “दादा” यानी सुवेंदु अधिकारी की संस्कृति, विचारों और बातों पर भरोसा है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल “भगवामय” हो चुका है और आने वाले समय में “राममय” भी होगा।

“कलकत्ता का पत्ता-पत्ता जय श्री राम के नारों से गूंजेगा।”

— धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

उनके इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति और धर्म से जुड़े मुद्दों पर बहस और तेज होने की संभावना है।

सीमा से घुसपैठ को लेकर भी दिया संदेश

अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र शास्त्री ने सीमा के रास्ते भारत में आने वाले लोगों को लेकर भी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने देश की सुरक्षा और राष्ट्रहित को लेकर कड़ा संदेश दिया।

उन्होंने कहा कि जो लोग भारत में घुसकर देश के खिलाफ गतिविधियां करते हैं, उन्हें समझना चाहिए कि अब परिस्थितियां बदल रही हैं। उन्होंने “बाबर वाले” और “रघुवर वाले” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए कहा कि अब देश में राष्ट्र और संस्कृति को प्राथमिकता देने वाले लोग मौजूद हैं।

राष्ट्र और सुरक्षा पर बयान

धीरेंद्र शास्त्री ने देश की सुरक्षा और राष्ट्रहित को लेकर सख्त संदेश दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी धर्म विशेष के लोगों से नहीं है।

धीरेंद्र शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी धर्म विशेष के लोगों से नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई उन लोगों से है जो भारत में रहते हैं और भारत का खाते हैं, लेकिन दूसरे देश के पक्ष में नारे लगाते हैं।

पुराने बयान को लेकर भी हुई चर्चा

धीरेंद्र शास्त्री की मौजूदा बंगाल यात्रा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि अक्टूबर 2025 में कोलकाता में प्रस्तावित उनकी हनुमंत कथा अनुमति रद्द होने के कारण नहीं हो सकी थी।

उस समय उन्होंने कथित तौर पर कहा था कि जब तक “दीदी” रहेंगी, वह पश्चिम बंगाल नहीं आएंगे और “दादा” के आने के बाद ही यहां कथा करेंगे।

अब जब वह पश्चिम बंगाल पहुंचे और कोलकाता में धार्मिक कथा का आयोजन हुआ, तो पत्रकारों ने उनसे उनके पुराने बयान को लेकर सवाल किया।

“हमारे मुंह से भगवान ने निकलवा दिया होगा। हमने कुछ नहीं किया, बंगाल की जनता ने किया है।”

— पुराने बयान पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री

इस पर उन्होंने कहा कि शायद वह बात भगवान ने उनके मुंह से निकलवा दी थी। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ नहीं किया बल्कि बंगाल की जनता ने बदलाव किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वह न किसी को वरदान दे सकते हैं और न ही किसी को श्राप दे सकते हैं।

उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि अगर उनके पास ऐसा करने की शक्ति होती तो वह पाकिस्तान को भस्म करने का श्राप दे देते।

आज कथा का आखिरी दिन

बता दें कि पश्चिम बंगाल में बाबा बागेश्वर की कथा पहली बार आयोजित की जा रही है। रविवार को उनकी कथा का तीसरा और अंतिम दिन बताया गया है। कथा और सत्संग में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात सामने आई है।

बाबा बागेश्वर की कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे। इस धार्मिक आयोजन को लेकर स्थानीय स्तर पर भी काफी उत्साह देखने को मिला। बताया गया कि सुवेंदु अधिकारी भी बाबा की कथा में शामिल हुए।

पश्चिम बंगाल में धीरेंद्र शास्त्री का यह दौरा धार्मिक आयोजन से आगे बढ़कर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय भी बन गया है। धर्मांतरण, घर वापसी, हिंदू संस्कृति और बंगाल की राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर दिए गए उनके बयानों पर आने वाले दिनों में प्रतिक्रियाएं देखने को मिल सकती हैं।

खबर की प्रमुख बातें

  • धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पश्चिम बंगाल में धार्मिक कार्यक्रम कर रहे हैं।
  • उन्होंने धर्मांतरण और घर वापसी को लेकर बड़ा दावा किया।
  • उन्होंने देश की पहचान को लेकर “अकबर” और “रघुवर” का जिक्र किया।
  • बंगाल को “भगवामय” और “राममय” बनाने की बात कही।
  • देश की सुरक्षा और सीमा से घुसपैठ को लेकर भी टिप्पणी की।
  • उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी लड़ाई किसी धर्म विशेष के लोगों से नहीं है।
  • उनकी बंगाल यात्रा उनके पुराने बयान के कारण भी चर्चा में है।
  • पश्चिम बंगाल में आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात कही गई है।
डिस्क्लेमर: इस खबर में शामिल बयान संबंधित वक्ता के सार्वजनिक संबोधन में कही गई बातों पर आधारित हैं। इनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस लेख का उद्देश्य नहीं है। पाठकों से अनुरोध है कि किसी भी संवेदनशील दावे या बयान को साझा करने से पहले विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी की पुष्टि करें।