राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक, समितियों के पुनर्गठन से लेकर नए महासचिव और CEO पर होगा मंथन
अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन स्तर पर महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना है। ट्रस्ट की बैठक में समितियों के पुनर्गठन, रिक्त पदों की पूर्ति, नए महासचिव और पहले CEO के चयन जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है।
धार्मिक न्यास समिति का भी होगा पुनर्गठन
ट्रस्ट की बैठक में धार्मिक न्यास समिति, निर्माण समिति, वित्त समिति, ऑडिट समिति के अलावा मैनेजिंग कमेटी के पुनर्गठन पर भी चर्चा होगी। इससे पहले 22 जुलाई को हुई बैठक में धार्मिक न्यास समिति के पुनर्गठन की प्रक्रिया शुरू की गई थी। हालांकि संतों के बीच कुछ नामों को लेकर पूर्ण सहमति नहीं बन सकी थी, जिसके चलते तीन अतिरिक्त सदस्यों के नामों की घोषणा नहीं हो पाई थी।
नौ सदस्यीय धार्मिक न्यास समिति में फिलहाल चार ट्रस्टियों को शामिल किया गया था। इनमें जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु माध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ, युगपुरुष स्वामी परमानंद और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास के नाम शामिल हैं।
धार्मिक न्यास समिति
समिति के पुनर्गठन और संतों के प्रतिनिधित्व को लेकर बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हो सकती है।
निर्माण समिति
मंदिर निर्माण से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन संबंधी विषयों पर भी विचार किया जा सकता है।
वित्त समिति
वित्तीय व्यवस्था और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं को लेकर भी चर्चा प्रस्तावित है।
ऑडिट समिति
ट्रस्ट की वित्तीय पारदर्शिता और ऑडिट से जुड़े विषय बैठक के एजेंडे में रह सकते हैं।
बताया जा रहा है कि नियमित ट्रस्टी होने के कारण शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती, माध्वाचार्य स्वामी विश्व प्रसन्न तीर्थ और युगपुरुष स्वामी परमानंद को पदेन सदस्य के रूप में समिति में शामिल किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में समिति में संतों के प्रतिनिधित्व को नए तरीके से व्यवस्थित करने की जरूरत होगी।
इसके चलते इन तीनों के स्थान पर अयोध्या के तीन अन्य संतों को समिति में शामिल किए जाने की संभावना है। समिति के अध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि और निर्मोही अखाड़ा के महंत दिनेंद्र दास के अपने पद पर बने रहने की संभावना जताई जा रही है।
धार्मिक न्यास समिति के पुनर्गठन में संतों के प्रतिनिधित्व और ट्रस्ट की प्रशासनिक जरूरतों के बीच संतुलन अहम मुद्दा रह सकता है।
रिक्त ट्रस्टी पदों पर भी होगा विचार
राम मंदिर ट्रस्ट की मुख्य बैठक शाम चार बजे से प्रस्तावित है। इससे पहले दोपहर दो बजे से एक विशेष बैठक आयोजित किए जाने की बात सामने आई है। विशेष बैठक में सबसे पहले ट्रस्ट के तीन रिक्त ट्रस्टी पदों को भरने पर विचार किया जा सकता है।
विशेष बैठक
ट्रस्ट के तीन रिक्त ट्रस्टी पदों की पूर्ति पर विचार किया जा सकता है।
मुख्य बैठक
विभिन्न समितियों के पुनर्गठन और प्रशासनिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
महासचिव और CEO पर चर्चा
पूर्णकालिक महासचिव और मंदिर के पहले CEO के चयन की प्रक्रिया पर विचार किया जा सकता है।
नए महासचिव के नाम पर मंथन
ट्रस्ट के पूर्णकालिक महासचिव को लेकर संगठन स्तर पर नए सिरे से विचार-विमर्श किए जाने की जानकारी सामने आई है। संबंधित संभावित नामों में से किसी एक पर सहमति बनाने की कोशिश चल रही है। यदि बैठक में आम सहमति बनती है तो पूर्णकालिक नए महासचिव के नाम की घोषणा भी संभव है।
इसके अलावा राम मंदिर के सचिव के रूप में जगदीश आफले और मंदिर के प्रबंधक नरपत डुकिया के नाम का अनुमोदन भी ट्रस्टियों द्वारा किए जाने की बात कही जा रही है। इन नियुक्तियों को मंदिर के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है।
गोपाल राव की जिम्मेदारियों में बदलाव
मंदिर निर्माण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों में भूमिका निभा चुके गोपाल राव को लेकर भी संगठनात्मक स्तर पर बदलाव हुआ है। जानकारी के अनुसार उन्हें वनवासी कल्याण आश्रम की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद उनका केंद्र दिल्ली कर दिया गया है।
गोपाल राव की भूमिका मंदिर निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण रही है। अब संगठन की नई जिम्मेदारी के साथ उनके कार्यक्षेत्र में बदलाव प्रशासनिक और संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पहले CEO के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ी
राम मंदिर ट्रस्ट की आगामी बैठक की सबसे महत्वपूर्ण चर्चाओं में मंदिर के पहले CEO का चयन भी शामिल हो सकता है। पहले CEO के चयन के लिए गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट ट्रस्ट के समक्ष प्रस्तुत कर दी है।
👤 CEO चयन समिति
पहले CEO के चयन के लिए गठित समिति ने अपनी सिफारिशें ट्रस्ट के सामने रखी हैं। समिति में तीन प्रमुख सदस्य शामिल थे।
इस समिति में सेवानिवृत्त लेफ्टिनेंट जनरल विष्णु कांत चतुर्वेदी, पूर्व वैज्ञानिक सुरेश हावड़े और पूर्व न्यायमूर्ति प्रमोद कोहली शामिल थे। समिति ने CEO पद के लिए अपनी सिफारिशें ट्रस्ट के सामने रखी हैं।
अब ट्रस्ट इन सिफारिशों पर विचार करेगा। CEO की नियुक्ति को मंदिर के बढ़ते प्रशासनिक, आर्थिक, तकनीकी और श्रद्धालु प्रबंधन से जोड़कर देखा जा रहा है। राम मंदिर में लगातार बढ़ रही गतिविधियों और भविष्य की व्यवस्थाओं को देखते हुए एक पेशेवर प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत महसूस की जा रही है।
मीडिया व्यवस्था में भी बदलाव संभव
बैठक में राम मंदिर ट्रस्ट के मीडिया प्रबंधन को लेकर भी निर्णय होने की संभावना है। प्रवक्ता के बजाय मीडिया प्रभारी की नियुक्ति किए जाने की चर्चा है। यदि यह फैसला होता है तो मंदिर ट्रस्ट की मीडिया और जनसंपर्क व्यवस्था को नए स्वरूप में व्यवस्थित किया जा सकता है।
- धार्मिक न्यास समिति के पुनर्गठन पर चर्चा
- तीन रिक्त ट्रस्टी पदों को भरने पर विचार
- पूर्णकालिक महासचिव के नाम पर मंथन
- मंदिर के सचिव और प्रबंधक के नामों का अनुमोदन
- पहले CEO की नियुक्ति पर सिफारिशों की समीक्षा
- मीडिया प्रभारी की नियुक्ति पर संभावित फैसला
क्या होंगे बड़े फैसले?
कुल मिलाकर 2 सितंबर की प्रस्तावित बैठक श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के लिए कई मायनों में महत्वपूर्ण रहने वाली है। समिति पुनर्गठन, रिक्त ट्रस्टी पदों की पूर्ति, पूर्णकालिक महासचिव की नियुक्ति, प्रशासनिक अधिकारियों के अनुमोदन और पहले CEO के चयन की प्रक्रिया जैसे मुद्दे बैठक के केंद्र में रहेंगे।
इन फैसलों से आने वाले समय में राम मंदिर के प्रशासन और प्रबंधन की दिशा और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है। मंदिर के विस्तार, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और भविष्य की व्यवस्थाओं को देखते हुए ट्रस्ट के प्रशासनिक ढांचे में होने वाले संभावित बदलावों पर सभी की नजर बनी हुई है।
