संत ज्ञानेश्वर के विचारों पर मुंबई यूनिवर्सिटी में मंथन | विद्वत परिषद 2026
BREAKING संत ज्ञानेश्वर के विचारों पर मुंबई यूनिवर्सिटी में विशेष मंथन
मंगलवार, 8 सितंबर 2026
धर्म एवं संस्कृति

संत ज्ञानेश्वर के विचारों पर मुंबई यूनिवर्सिटी में मंथन, 750वीं जयंती पर विद्वत परिषद 2026 का आयोजन

संत ज्ञानेश्वर के साहित्य, दर्शन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनसंवाद को आधुनिक संदर्भों में समझने के लिए मुंबई यूनिवर्सिटी में विशेष विद्वत परिषद का आयोजन किया गया।

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विशेष आयोजन • मुंबई

ज्ञानेश्वर माऊली की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने पर विद्वानों ने किया विचार-मंथन

मुंबई: संत ज्ञानेश्वर माऊली की 750वीं जयंती वर्ष के अवसर पर मुंबई यूनिवर्सिटी में ‘ज्ञानेश्वर माऊली विद्वत परिषद 2026’ का आयोजन किया गया। इस विशेष परिषद में संत ज्ञानेश्वर के साहित्य, दर्शन, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनसंवाद से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विद्वानों ने विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संत ज्ञानेश्वर के विचारों को आधुनिक संदर्भों में समझना और उन्हें नई पीढ़ी तक पहुंचाने के तरीकों पर विचार करना रहा। महाराष्ट्र शासन के सांस्कृतिक कार्य विभाग और मुंबई यूनिवर्सिटी के संयुक्त तत्वावधान में 4 सितंबर को विद्यानगरी स्थित विश्वविद्यालय के सभागार में इस परिषद का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों, प्राध्यापकों, साहित्य प्रेमियों और संत ज्ञानेश्वर के विचारों में रुचि रखने वाले अनेक लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

“ज्ञान से विवेक की ओर ले जाए शिक्षा”

कार्यक्रम में इस बात पर जोर दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल जानकारी और ज्ञान देना नहीं, बल्कि व्यक्ति को विवेकपूर्ण सोच और सकारात्मक जीवन मूल्यों की दिशा में आगे बढ़ाना भी होना चाहिए।

संत ज्ञानेश्वर की शिक्षाओं को आधुनिक संदर्भ में समझने पर जोर

परिषद का उद्घाटन महाराष्ट्र के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशिष शेलार ने किया। इस अवसर पर उन्होंने संत ज्ञानेश्वर के जीवन और उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके विचार केवल आध्यात्मिक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था और युवा पीढ़ी के लिए भी बेहद प्रासंगिक हैं।

आशिष शेलार ने कहा कि संत ज्ञानेश्वर ने बेहद कम उम्र में लोक साहित्य और आध्यात्मिक चिंतन को नई दिशा दी। उन्होंने ज्ञान को आम लोगों तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया। वर्तमान समय में शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्ति को जानकारी उपलब्ध कराना नहीं होना चाहिए, बल्कि शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो ज्ञान को विवेक में बदलने की क्षमता पैदा करे।

उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि संत ज्ञानेश्वर के विचारों को केवल धार्मिक या ऐतिहासिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय उन्हें वर्तमान सामाजिक और शैक्षणिक परिस्थितियों से जोड़कर समझने की जरूरत है।

‘ज्ञानेश्वरी’ में सकारात्मक बदलाव की शक्ति

मुंबई यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. रवींद्र कुलकर्णी ने भी परिषद को संबोधित किया। उन्होंने संत ज्ञानेश्वर की प्रसिद्ध रचना ‘ज्ञानेश्वरी’ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इसमें मनुष्य के मन, भावनाओं और विचारों में सकारात्मक परिवर्तन लाने की बड़ी क्षमता है।

उनके अनुसार आज की युवा पीढ़ी तेजी से बदलते सामाजिक और तकनीकी वातावरण के बीच आगे बढ़ रही है। ऐसे समय में संत ज्ञानेश्वर का साहित्य युवाओं को आत्मचिंतन, सकारात्मक सोच और जीवन मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

📌 परिषद की प्रमुख बातें
  • आयोजन: ज्ञानेश्वर माऊली विद्वत परिषद 2026
  • अवसर: संत ज्ञानेश्वर की 750वीं जयंती वर्ष
  • स्थान: मुंबई यूनिवर्सिटी, विद्यानगरी
  • आयोजक: महाराष्ट्र शासन का सांस्कृतिक कार्य विभाग एवं मुंबई यूनिवर्सिटी
  • मुख्य विषय: साहित्य, दर्शन, शिक्षा, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और जनसंवाद

साहित्य, दर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर चर्चा

‘ज्ञानेश्वर माऊली विद्वत परिषद 2026’ में संत ज्ञानेश्वर के व्यक्तित्व और कृतित्व के विभिन्न आयामों पर चर्चा हुई। परिषद में साहित्य और दर्शन के साथ-साथ उनके विचारों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा आधुनिक जनसंवाद के संदर्भ में समझने का प्रयास किया गया।

विद्वानों ने इस बात पर मंथन किया कि सदियों पहले संत ज्ञानेश्वर द्वारा प्रस्तुत विचार आज के समाज में किस तरह उपयोगी हो सकते हैं। विशेष रूप से मानव जीवन, नैतिक मूल्यों, सकारात्मक सोच, आत्मज्ञान और सामाजिक समरसता से जुड़े उनके संदेशों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर चर्चा हुई।

कार्यक्रम के दौरान यह विचार भी सामने आया कि संत ज्ञानेश्वर की शिक्षाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए पारंपरिक माध्यमों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म और आधुनिक संचार माध्यमों का प्रभावी इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

कई गणमान्य लोग रहे मौजूद

इस विद्वत परिषद में मुंबई यूनिवर्सिटी के कुलगुरु प्रोफेसर डॉ. रवींद्र कुलकर्णी, प्र-कुलगुरु प्राचार्य डॉ. अजय भामरे और साहित्य अकादमी, महाराष्ट्र राज्य के सहसंचालक सचिन निंबालकर सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने भी संत ज्ञानेश्वर के विचारों को समझने में रुचि दिखाई। परिषद ने विश्वविद्यालय परिसर में आध्यात्मिक साहित्य, भारतीय दर्शन और संत परंपरा को लेकर एक गंभीर अकादमिक संवाद का अवसर उपलब्ध कराया।

युवाओं तक पहुंचाना समय की जरूरत

संत ज्ञानेश्वर की 750वीं जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित यह परिषद केवल एक स्मरण कार्यक्रम नहीं रही, बल्कि उनके विचारों को वर्तमान समय के संदर्भ में देखने का मंच भी बनी। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि संत ज्ञानेश्वर के साहित्य और दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

आज जब युवा पीढ़ी शिक्षा, तकनीक और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के बीच नई चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में संत ज्ञानेश्वर के विचार उन्हें जीवन में संतुलन, सकारात्मकता और विवेक की दिशा दिखा सकते हैं।

‘ज्ञानेश्वरी’ जैसे साहित्य को आधुनिक शैक्षणिक विमर्श से जोड़कर विद्यार्थियों तक पहुंचाने की पहल भारतीय ज्ञान परंपरा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।

संत ज्ञानेश्वर की 750वीं जयंती के अवसर पर आयोजित ‘विद्वत परिषद 2026’ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारतीय संत परंपरा का साहित्य केवल अतीत की धरोहर नहीं है, बल्कि उसमें वर्तमान और भविष्य के समाज के लिए भी महत्वपूर्ण विचार मौजूद हैं।

मुंबई यूनिवर्सिटी में हुए इस आयोजन के माध्यम से संत ज्ञानेश्वर के ज्ञान, दर्शन और मानवीय मूल्यों को आधुनिक पीढ़ी के साथ जोड़ने की कोशिश सामने आई।