90 साल की सास को कांवड़ में बैठाकर 71 किलो गंगाजल लेकर निकलीं काजल चौधरी
सावन में कांवड़ यात्रा के बीच एक बहू की भक्ति, सेवा और समर्पण की कहानी लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। काजल चौधरी अपनी 90 वर्षीय सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली की ओर यात्रा कर रही हैं।
नई दिल्ली: सावन का महीना शुरू होते ही देशभर में कांवड़ यात्रा का माहौल बन गया है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर हजारों शिवभक्त अपने-अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। लेकिन इस बार एक बहू की कांवड़ यात्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। वजह है उनकी भक्ति के साथ अपनी 90 वर्षीय सास के प्रति दिखाई गई सेवा और समर्पण।
दिल्ली के शाहदरा की रहने वाली काजल चौधरी इन दिनों सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई हैं। काजल अपनी 90 वर्षीय सास चन्द्रिदेवी को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली की ओर यात्रा कर रही हैं। कांवड़ के एक ओर उनकी सास बैठी हैं, जबकि दूसरी ओर करीब 71 किलो गंगाजल रखा गया है। कंधे पर इतना भार लेकर पैदल चलती काजल की तस्वीरें और वीडियो लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं।
काजल चौधरी की यात्रा की खास बातें
- 90 वर्षीय सास चन्द्रिदेवी को कांवड़ में बैठाया
- हरिद्वार से दिल्ली की ओर पैदल यात्रा
- कांवड़ में करीब 71 किलो गंगाजल
- पहले ब्रज की 84 कोस यात्रा भी कर चुकी हैं
- 2025 में भी कांवड़ यात्रा करने की बात सामने आई
सास को कांवड़ में बैठाकर निकलीं काजल
काजल चौधरी की यह यात्रा केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे वह अपनी सास की सेवा और उनके आशीर्वाद से भी जोड़ती हैं। बताया जा रहा है कि हरिद्वार से गंगाजल लेकर काजल दिल्ली की ओर बढ़ रही हैं और यात्रा के दौरान मुजफ्फरनगर तक पहुंच चुकी थीं।
रास्ते में जब लोगों ने काजल को देखा तो वे कुछ पल के लिए ठिठक गए। एक तरफ कांवड़ में 90 साल की बुजुर्ग सास और दूसरी तरफ 71 किलो गंगाजल। काजल तेज कदमों से आगे बढ़ती नजर आईं। इस दृश्य ने कई लोगों को भावुक कर दिया।
सोशल मीडिया पर कुछ लोग उन्हें 'कलयुग का श्रवण कुमार' कह रहे हैं तो कई लोग इसे बहू और सास के रिश्ते की बेहद खूबसूरत मिसाल बता रहे हैं।
पहले भी कर चुकी हैं अनोखी यात्रा
काजल चौधरी के लिए यह पहली बार नहीं है जब उन्होंने अपनी सास के लिए ऐसा कठिन सफर चुना हो। इससे पहले वह अपनी 90 वर्षीय सास को सिर पर प्लास्टिक के बड़े टब में बैठाकर ब्रज की 84 कोस यात्रा करा चुकी हैं। उस समय भी उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे।
उनकी उस यात्रा ने भी लोगों का ध्यान खींचा था और बड़ी संख्या में लोगों ने काजल के समर्पण की तारीफ की थी। अब एक बार फिर काजल अपनी सास को साथ लेकर कांवड़ यात्रा पर निकली हैं।
2025 में भी की थी कांवड़ यात्रा
बताया जाता है कि काजल चौधरी ने वर्ष 2025 में भी अपनी सास को कांवड़ में बैठाकर हरिद्वार से दिल्ली तक की यात्रा पूरी की थी। इस बार वह दोबारा इसी तरह की यात्रा पर निकली हैं। उनके साथ परिवार के सदस्य भी मौजूद हैं और यात्रा में उनका छोटा बेटा मनीष चौधरी तथा परिवार के अन्य लोग भी शामिल बताए जा रहे हैं।
काजल के लिए यह यात्रा सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं बल्कि अपनी बुजुर्ग सास की सेवा का अवसर भी है।
गायिका भी हैं काजल चौधरी
काजल चौधरी पेशे से गायिका हैं और देहाती रागनी तथा भजनों के कारण सोशल मीडिया पर उनकी अच्छी पहचान है। अपने गायन के अलावा वह सामाजिक और धार्मिक गतिविधियों के कारण भी चर्चा में रहती हैं।
काजल अक्सर लोगों से कहती हैं कि माता-पिता और सास-ससुर की सेवा इस तरह करनी चाहिए कि जब वे इस दुनिया से विदा हों तो उनके चेहरे पर संतोष हो और उनके आशीर्वाद की छाया परिवार के साथ रहे।
उनका कहना है कि बुजुर्गों की सेवा केवल जिम्मेदारी नहीं बल्कि हमारा कर्म और संस्कार भी है।
अब योगी आदित्यनाथ से मिलना चाहती हैं सास
काजल चौधरी की इस यात्रा से जुड़ी एक और इच्छा सामने आई है। उनकी 90 वर्षीय सास चन्द्रिदेवी की इच्छा उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मिलने की बताई जा रही है। काजल चाहती हैं कि उनकी सास की यह इच्छा पूरी हो और उन्हें योगी आदित्यनाथ से मिलने का अवसर मिले।
फिलहाल काजल चौधरी अपनी सास और 71 किलो गंगाजल के साथ दिल्ली की ओर बढ़ रही हैं। उनकी यात्रा की तस्वीरें लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर रही हैं कि रिश्ते केवल खून से नहीं, बल्कि सेवा, सम्मान और समर्पण से भी मजबूत होते हैं।
काजल की कहानी भले ही एक कांवड़ यात्रा की हो, लेकिन इसके पीछे छिपा संदेश इससे कहीं बड़ा है—बुजुर्गों की सेवा और उनका सम्मान किसी एक बेटे या बेटी की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि परिवार के हर सदस्य के संस्कार की पहचान हो सकतीे ह
