बागेश्वर धाम के धीरेंद्र शास्त्री का बंगाल में बड़ा बयान, बोले- ‘ये देश अकबर का नहीं, रघुवर का है’
पश्चिम बंगाल में गीता पाठ और कथा कार्यक्रम के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धर्मांतरण, घर वापसी, भारतीय संस्कृति और देश की सीमाओं से जुड़े मुद्दों पर कई बयान दिए।
पश्चिम बंगाल इन दिनों धार्मिक और राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। बागेश्वर धाम के प्रमुख पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों पश्चिम बंगाल में गीता पाठ और कथा कार्यक्रम में शामिल हो रहे हैं। इस दौरान उन्होंने धर्मांतरण, घर वापसी, भारतीय संस्कृति और देश की सीमाओं से जुड़े मुद्दों पर कई तीखे बयान दिए हैं। उनके बयानों के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर एक बार फिर बहस तेज हो गई है।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कथित तौर पर कहा कि बंगाल में अब तक जितना धर्मांतरण हुआ है, उन लोगों की फिर से ‘घर वापसी’ होगी। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय सांस्कृतिक पहचान पर जोर देते हुए कहा कि देश की पहचान किसी मुगल शासक के नाम से नहीं, बल्कि भगवान श्रीराम और भारतीय परंपरा से जुड़ी है।
‘ये देश अकबर का नहीं, रघुवर का है’
बाबा बागेश्वर ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि ‘ये देश अकबर का नहीं, रघुवर का है।’ उन्होंने कहा कि एक समय ऐसा था जब यहां कुछ निर्माण एक विशेष नाम से किए जा रहे थे, लेकिन अब जो भी बनेगा वह रघुवर के नाम से बनेगा।
“ये देश अकबर का नहीं, रघुवर का है।”
उनके इस बयान को भगवान श्रीराम और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। धीरेंद्र शास्त्री लगातार अपने धार्मिक कार्यक्रमों में भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और धार्मिक जागरूकता को लेकर लोगों को संबोधित करते रहे हैं।
उन्होंने बंगाल के संदर्भ में कहा कि राज्य में सांस्कृतिक बदलाव दिखाई दे रहा है और आने वाले समय में बंगाल को ‘राममय’ बनाने की बात कही।
‘कहते थे बंगाल में घुसने नहीं दिया जाएगा’
धीरेंद्र शास्त्री ने अपनी बंगाल यात्रा को लेकर उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो कथित तौर पर उनके पश्चिम बंगाल आने का विरोध कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि कुछ लोग कहते थे कि पश्चिम बंगाल में बाबा को प्रवेश नहीं करने दिया जाएगा। इसके जवाब में उन्होंने कहा कि अब वह बंगाल में आ चुके हैं। उन्होंने राज्य की राजनीतिक परिस्थितियों का जिक्र करते हुए सुवेंदु अधिकारी को ‘दादा’ कहकर संबोधित किया और उनकी संस्कृति तथा विचारों पर भरोसा जताया।
उन्होंने कहा कि कोलकाता का पत्ता-पत्ता ‘जय श्री राम’ के नारों से गूंजेगा। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा देखने को मिली।
सीमा से घुसपैठ को लेकर भी दिया बयान
अपने संबोधन के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने देश की सीमाओं से आने वाले लोगों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने सीमा के रास्ते भारत में आने वाले लोगों को लेकर कड़ा बयान दिया और ऐसे लोगों को ‘देशद्रोही’ बताते हुए चेतावनी दी।
उन्होंने कहा कि अब देश में ‘बाबर वाले नहीं, रघुवर वाले’ बैठे हैं। उन्होंने अपने भाषण में यह भी कहा कि देश के खिलाफ गतिविधियां करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
“हमारी लड़ाई किसी धर्म विशेष के लोगों से नहीं है, बल्कि उन लोगों से है जो भारत में रहकर देश के हितों के खिलाफ खड़े होते हैं।”
हालांकि, अपने बयान में उन्होंने यह स्पष्ट करने की कोशिश भी की कि उनकी लड़ाई मुसलमानों या ईसाइयों से नहीं है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई उन लोगों से है जो भारत में रहते हुए देश के हितों के खिलाफ खड़े होते हैं।
पुराने बयान की भी हुई चर्चा
बाबा बागेश्वर की वर्तमान बंगाल यात्रा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इससे पहले उनके एक पुराने बयान को लेकर काफी विवाद हुआ था। अक्टूबर 2025 में कोलकाता में प्रस्तावित हनुमंत कथा कार्यक्रम अनुमति नहीं मिलने के कारण आयोजित नहीं हो सका था।
उस समय धीरेंद्र शास्त्री ने कथित तौर पर कहा था कि जब तक ‘दीदी’ रहेंगी, तब तक वह पश्चिम बंगाल नहीं आएंगे और ‘दादा’ के आने के बाद ही कथा करने आएंगे।
‘भगवान ने हमारे मुंह से निकलवा दिया होगा’
अब जब वह पश्चिम बंगाल पहुंचे और कोलकाता में कथा कार्यक्रम में शामिल हुए तो पत्रकारों ने उनसे उनके पुराने बयान को लेकर सवाल किया।
इस पर धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि संभव है कि वह बात भगवान ने उनके मुंह से निकलवा दी हो। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ नहीं किया, बल्कि बंगाल की जनता ने किया है। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय उनके मुंह से जो बात निकली थी, वह अब पूरी हो गई है।
“हमने कुछ नहीं किया, बंगाल की जनता ने किया है। हमारे मुंह से निकल गया था कि दीदी नहीं बुलाई तो अब जब दादा आएंगे तब कथा करने जाएंगे। लेकिन इसे भगवान ने पूरा कर दिया।”
उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वह किसी को वरदान या श्राप नहीं दे सकते। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान को लेकर भी तीखी टिप्पणी की और अपने पुराने बयान के संदर्भ में अपनी बात रखी।
पहली बार बंगाल में बागेश्वर धाम की कथा
पश्चिम बंगाल में बाबा बागेश्वर की कथा पहली बार आयोजित होने की बात कही जा रही है। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की खबर है। धार्मिक कार्यक्रम को लेकर लोगों में खासा उत्साह दिखाई दे रहा है।
कथा के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने धार्मिक आस्था, भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और सामाजिक विषयों पर लोगों को संबोधित किया। उनके कार्यक्रम में राजनीतिक हस्तियों की मौजूदगी ने भी इसे चर्चा का विषय बना दिया।
धार्मिक कार्यक्रम
पश्चिम बंगाल में गीता पाठ और कथा कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
धर्मांतरण और घर वापसी
धीरेंद्र शास्त्री ने धर्मांतरण और घर वापसी को लेकर अपना पक्ष रखा।
पुराने बयान की चर्चा
पत्रकारों ने उनसे उनके पुराने बंगाल संबंधी बयान पर सवाल किया।
कथा में श्रद्धालुओं की भीड़
कथा सुनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की बात सामने आई।
सुवेंदु अधिकारी भी पहुंचे कथा में
बताया गया कि भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी भी बाबा की कथा सुनने पहुंचे। इसके बाद धीरेंद्र शास्त्री के पुराने बयान और वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर चर्चाओं का दौर और तेज हो गया।
धार्मिक कार्यक्रम में राजनीतिक चेहरे की मौजूदगी ने इस पूरे घटनाक्रम को और अधिक चर्चा में ला दिया। समर्थकों ने इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देखा, जबकि आलोचकों की ओर से इसे राजनीतिक संदर्भों से जोड़कर सवाल उठाए जा रहे हैं।
बयान से बढ़ी राजनीतिक चर्चा
धीरेंद्र शास्त्री के बंगाल दौरे और उनके बयानों को केवल धार्मिक कार्यक्रम के नजरिए से नहीं देखा जा रहा है। उनके बयान ऐसे समय में सामने आए हैं जब पश्चिम बंगाल में धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक राजनीति, घुसपैठ और सामाजिक मुद्दे लगातार राजनीतिक बहस का हिस्सा बने हुए हैं।
उनके समर्थक इन बयानों को हिंदू संस्कृति और धार्मिक जागरूकता से जोड़कर देखते हैं, जबकि आलोचक इसे राजनीतिक ध्रुवीकरण से जोड़ते हैं। ऐसे में उनके बंगाल दौरे का असर आने वाले दिनों में सामाजिक और राजनीतिक चर्चाओं में दिखाई दे सकता है।
फिलहाल बाबा बागेश्वर की कथा में उमड़ रही भीड़ और उनके बयानों ने पश्चिम बंगाल में धार्मिक कार्यक्रम को एक बड़े सार्वजनिक विमर्श में बदल दिया है। धर्मांतरण, घर वापसी, राम और भारतीय सांस्कृतिक पहचान जैसे मुद्दों पर धीरेंद्र शास्त्री के विचार आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बने रहने की संभावना है।
