गणेश चतुर्थी 2026: 10 दिनों तक बप्पा को चढ़ाएं ये पसंदीदा नैवेद्य, मोदक से लेकर लड्डू तक
🕉️ गणेश उत्सव 2026

गणेश चतुर्थी 2026: 10 दिनों तक बप्पा को चढ़ाएं ये पसंदीदा नैवेद्य

मोदक से लेकर मोतीचूर के लड्डू, पूरन पोली, श्रीखंड और पंचामृत तक जानिए भगवान गणेश को अर्पित किए जाने वाले प्रमुख प्रसाद और नैवेद्य।

📅 गणेश चतुर्थी: 14 सितंबर 2026
🪔 गणेश विसर्जन: 23 सितंबर 2026

नई दिल्ली। भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता के रूप में पूजा जाता है। हिंदू धर्म में किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के स्मरण और पूजन से करने की परंपरा है। गणेश चतुर्थी का पर्व भी इसी आस्था और भक्ति का महत्वपूर्ण उत्सव है।

इस दौरान घरों और सार्वजनिक पंडालों में गणपति बप्पा की स्थापना की जाती है और श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ उनकी पूजा-अर्चना करते हैं। साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर, सोमवार को मनाई जाएगी, जबकि दस दिवसीय गणेशोत्सव का समापन 23 सितंबर 2026, बुधवार को गणेश विसर्जन यानी अनंत चतुर्दशी के साथ होगा।

🌺 गणपति को भोग लगाने की परंपरा

गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश को अलग-अलग प्रकार के नैवेद्य और प्रसाद अर्पित किए जाते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार मोदक गणपति बप्पा का सबसे प्रिय प्रसाद माना जाता है। इसके अलावा कई पारंपरिक मिठाइयां, फल और सात्विक पकवान भी भोग में शामिल किए जाते हैं।

🙏 बप्पा को चढ़ाएं ये 10 प्रमुख नैवेद्य

1

मोदक

भगवान गणेश को मोदक सबसे प्रिय प्रसाद माना जाता है। गणेश उत्सव के पहले दिन मोदक का भोग लगाना विशेष शुभ माना जाता है। इसे नारियल और गुड़ की फिलिंग के साथ चावल या गेहूं के आटे से बनाया जाता है।

2

मोतीचूर के लड्डू

मोतीचूर के छोटे-छोटे लड्डू गणपति पूजा में लोकप्रिय प्रसाद हैं। बूंदी से तैयार किए जाने वाले इन लड्डुओं को श्रद्धापूर्वक भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है।

3

पूरन पोली

महाराष्ट्र का पारंपरिक पकवान पूरन पोली गणेश उत्सव में विशेष रूप से बनाया जाता है। चने की दाल और गुड़ से तैयार मीठी भरावन को आटे में भरकर इसे बनाया जाता है।

4

बेसन के लड्डू

बेसन, घी और चीनी से बने बेसन के लड्डू स्वादिष्ट होने के साथ भगवान गणेश को अर्पित किए जाने वाले लोकप्रिय प्रसादों में शामिल हैं।

5

केले का भोग

केला शुभ फल माना जाता है। इसे भगवान गणेश को सीधे प्रसाद के रूप में चढ़ाया जा सकता है। केले से तैयार हलवा भी सात्विक भोग के रूप में अर्पित किया जा सकता है।

6

मखाने की खीर

दूध, मखाने और मेवों से तैयार मखाने की खीर गणपति के भोग में शामिल की जा सकती है। यह स्वादिष्ट और सात्विक प्रसाद माना जाता है।

7

नारियल

पूजा-पाठ में नारियल का विशेष महत्व माना जाता है। भगवान गणेश को नारियल अर्पित करने के साथ नारियल से बने लड्डू भी भोग में चढ़ाए जा सकते हैं।

8

श्रीखंड

महाराष्ट्र और गुजरात में लोकप्रिय श्रीखंड दही, चीनी, केसर और इलायची से तैयार किया जाता है। इसे मेवों से सजाकर भगवान गणेश को भोग लगाया जा सकता है।

9

चूरमा

राजस्थान का प्रसिद्ध चूरमा भी गणपति के भोग में शामिल किया जा सकता है। इसे गेहूं के आटे, घी और गुड़ या चीनी से तैयार किया जाता है।

10

पंचामृत

दूध, दही, घी, शहद और जल से तैयार पंचामृत पूजा में विशेष पवित्र माना जाता है। इसका उपयोग अभिषेक और प्रसाद दोनों रूपों में किया जा सकता है।

🍚 इन प्रसादों के अलावा भी लगा सकते हैं भोग

इन दस प्रमुख नैवेद्यों के अलावा गणपति बप्पा को कई अन्य सात्विक खाद्य पदार्थ भी अर्पित किए जा सकते हैं।

  • खीर
  • सूजी का हलवा
  • पेड़े
  • सूखे मेवे
  • विभिन्न प्रकार के फल
  • नारियल से बनी मिठाइयां

भोग से ज्यादा महत्वपूर्ण है श्रद्धा

भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद की भव्यता से अधिक महत्वपूर्ण भक्त की श्रद्धा और भावना मानी जाती है। गणेशोत्सव के दौरान प्रसाद शुद्ध, सात्विक और स्वच्छ तरीके से तैयार करना चाहिए। पूजा के बाद प्रसाद को परिवार, मित्रों, पड़ोसियों और जरूरतमंद लोगों के साथ साझा करना उत्सव की खुशी को और बढ़ाता है।

🌼 गणेशोत्सव का संदेश

गणेश चतुर्थी केवल पूजा और उत्सव का पर्व नहीं है, बल्कि यह परिवार, समाज, सेवा, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश भी देता है। दस दिनों तक गणपति बप्पा की आराधना के बाद विसर्जन के समय श्रद्धालु उनसे अगले वर्ष फिर आने की प्रार्थना करते हैं।

धार्मिक संदर्भ:
वरुण पीठाधीश्वर अघोराचार्य जगद्गुरु स्वामी महंथ डॉ. श्री दुर्गेश गिरी महाराज गुरु जी, आवाहन अखाड़ा