VHP ने रखे कई सुझाव; बंगाल की दुर्गा पूजा में ‘साबेकियाना’ की वापसी पर जोर, थीम पंडाल से लेकर नॉनवेज तक पर कही बड़ी बात
हर साल पूजा समितियां नई-नई थीम और रचनात्मक प्रयोगों के जरिए लोगों का ध्यान आकर्षित करती हैं। हालांकि, 2026 की दुर्गा पूजा से पहले पूजा के तौर-तरीकों और परंपराओं को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने अपनी राय सामने रखी है।
संगठन ने पूजा समितियों से धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय नियमों का पालन करने की अपील की है। VHP के केंद्रीय मार्गदर्शक मंडल के सदस्य निर्वाणानंद महाराज ने दुर्गा पूजा में पुराने पारंपरिक अंदाज यानी ‘साबेकियाना’ को वापस लाने पर जोर दिया है।
🔴 VHP का मुख्य जोर
पूजा की धार्मिक गरिमा, पारंपरिक रीति-रिवाज और सात्त्विक वातावरण बनाए रखने पर VHP ने विशेष जोर दिया है।
‘साबेकियाना’ शैली में लौटे पारंपरिक पूजा का स्वरूप
VHP का कहना है कि दुर्गा पूजा के दौरान धार्मिक भावना और पारंपरिक स्वरूप को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। निर्वाणानंद महाराज के मुताबिक, देवी की प्रतिमा को खुले और उचित स्थान पर स्थापित करने से श्रद्धालुओं को दर्शन और विदाई की पारंपरिक भावना बेहतर तरीके से अनुभव हो सकती है।
मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार, बुधवार को VHP ने फोरम फॉर दुर्गोत्सव और कई पूजा समितियों के प्रतिनिधियों के साथ चर्चा की। इसके बाद आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में संगठन की ओर से पूजा को लेकर कई सुझाव सामने रखे गए।
VHP ने पूजा की सात्त्विकता, धार्मिक गरिमा और पारंपरिक रीति-रिवाजों को बनाए रखने पर विशेष जोर दिया।
थीम पंडालों का विरोध नहीं, लेकिन ‘फूहड़पन’ से आपत्ति
कोलकाता की दुर्गा पूजा में थीम आधारित पंडाल अब इसकी खास पहचान बन चुके हैं। हर साल पूजा समितियां कला, इतिहास, संस्कृति और सामाजिक संदेशों पर आधारित अलग-अलग थीम तैयार करती हैं। VHP ने थीम पंडालों का सीधे तौर पर विरोध नहीं किया है।
हालांकि संगठन का कहना है कि थीम के नाम पर ऐसी प्रस्तुति नहीं होनी चाहिए जिसे भारतीय या बंगाली संस्कृति के विरुद्ध माना जाए। निर्वाणानंद महाराज ने संकेत दिया कि सांस्कृतिक कार्यक्रमों और प्रस्तुतियों में अश्लीलता या फूहड़पन को जगह नहीं मिलनी चाहिए।
VHP की आपत्ति रचनात्मकता से ज्यादा उस प्रस्तुति को लेकर है जिसे संगठन धार्मिक और सांस्कृतिक मर्यादा के विपरीत मानता है।
पूजा मंडप के अंदर नॉनवेज पर आपत्ति
बैठक में पूजा मंडप के भीतर मांसाहारी भोजन के मुद्दे पर भी चर्चा हुई। VHP ने कहा कि पूजा मंडप के बाहर निर्धारित स्थान पर नॉनवेज भोजन की बिक्री की जा सकती है, लेकिन उसे पूजा स्थल के अंदर नहीं लाया जाना चाहिए।
संगठन ने इस बात पर जोर दिया कि पूजा स्थल की धार्मिक प्रकृति और पवित्रता का ध्यान रखा जाना चाहिए। निर्वाणानंद महाराज ने यह भी कहा कि अलग-अलग धर्मों के अपने त्योहार और परंपराएं होती हैं और सनातन समाज को अपने धार्मिक त्योहारों को सनातन परंपराओं के अनुरूप मनाना चाहिए।
📌 VHP के प्रमुख सुझाव
- दुर्गा पूजा में पारंपरिक ‘साबेकियाना’ शैली को प्राथमिकता।
- थीम पंडालों में भारतीय और बंगाली संस्कृति की झलक।
- पूजा मंडप के अंदर मांसाहारी भोजन नहीं लाने की अपील।
- प्रतिमा निर्माण के दौरान तस्वीरें न लेने की अपील।
- बोधन और उद्घाटन को अलग-अलग धार्मिक प्रक्रिया मानने पर जोर।
- पूजा शास्त्रीय और पारंपरिक नियमों के अनुसार कराने की अपील।
- कार्निवल को विसर्जन के दिन आयोजित करने का सुझाव।
मां की प्रतिमा बनाते समय फोटो न लेने की अपील
VHP ने कोलकाता के प्रसिद्ध कुम्हारटोली में बनने वाली दुर्गा प्रतिमाओं को लेकर भी अपनी राय रखी। संगठन ने अपील की कि जब देवी की प्रतिमा निर्माण की प्रक्रिया चल रही हो, उस समय उसकी तस्वीरें नहीं खींची जानी चाहिए।
निर्वाणानंद महाराज ने प्रतिमा निर्माण से जुड़े कुछ व्यवहारों को लेकर ‘विकृत मानसिकता’ रोकने की जरूरत बताई। VHP का कहना है कि प्रतिमा निर्माण से लेकर पूजा और विसर्जन तक धार्मिक परंपरा की गरिमा बनाए रखना जरूरी है।
कुम्हारटोली लंबे समय से दुर्गा प्रतिमा बनाने वाले कलाकारों और मूर्तिकारों का प्रमुख केंद्र रहा है और यहां तैयार होने वाली प्रतिमाएं कोलकाता की पूजा संस्कृति का अहम हिस्सा हैं।
बोधन और उद्घाटन को अलग मानने पर जोर
पूजा के उद्घाटन को लेकर भी VHP ने अपनी राय स्पष्ट की। निर्वाणानंद महाराज के अनुसार, केवल देवी की आंखों में रंग भरना या दीप जलाना ही पूजा का उद्घाटन नहीं माना जाना चाहिए। उन्होंने बोधन और उद्घाटन को अलग-अलग धार्मिक प्रक्रियाएं बताया।
VHP ने पूजा समितियों से हिंदू शास्त्रों में बताए गए नियमों और पारंपरिक विधियों के अनुसार पूजा करने की अपील की है। संगठन का जोर इस बात पर है कि आधुनिक आयोजन के बीच पूजा की मूल धार्मिक परंपराएं कमजोर न हों।
विसर्जन के दिन कार्निवल की सलाह
दुर्गा पूजा के बाद होने वाले कार्निवल को लेकर भी VHP ने अपनी राय रखी है। संगठन का कहना है कि यदि दुर्गा पूजा को कार्निवल का रूप दिया जाता है तो इसे विसर्जन के दिन आयोजित किया जाना चाहिए।
