संत समाज के सम्मेलन में सुनीता मिश्रा ने उठाए मंदिरों की व्यवस्था और संतों के सम्मान के सवाल
कहा—सरकार का रवैया ठीक, लेकिन गांव स्तर पर संतों के साथ हो रहा अपमान गंभीर चिंता का विषय
मिर्जापुर। संत समाज के एक सम्मेलन में भारतीय धर्मसंघ की संयोजक सुनीता मिश्रा ने संतों के सम्मान, ग्रामीण क्षेत्रों में मंदिरों की व्यवस्था और धार्मिक स्थलों पर बढ़ती अराजकता को लेकर गंभीर सवाल उठाए। मिर्जापुर स्थित एक आश्रम में आयोजित सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार का रवैया संत समाज के प्रति ठीक दिखाई देता है, लेकिन गांवों में प्रशासनिक व्यवस्था और स्थानीय स्तर पर संतों के साथ व्यवहार को लेकर कई गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं।
सुनीता मिश्रा ने कहा कि गांवों के प्रधान और स्थानीय स्तर के कुछ जिम्मेदार लोग संतों का अपेक्षित सम्मान नहीं करते। कई स्थानों पर संतों के साथ कथित रूप से अपमानजनक व्यवहार किया जाता है और उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं सुना जाता। उन्होंने कहा कि सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि जब संत अपनी परेशानी लेकर अधिकारियों के पास पहुंचते हैं तो उन्हें भी कई बार उचित सम्मान और सहयोग नहीं मिलता।
उन्होंने अधिकारियों द्वारा संतों से कथित तौर पर कही जाने वाली टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि किसी संत को इतना ही कष्ट है तो उन्होंने बाबा बनने का रास्ता क्यों चुना, कोई दूसरा काम-धंधा कर लेते। सुनीता मिश्रा ने इस तरह की भाषा और सोच की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि किसी व्यक्ति का साधु या संत बनना उसके सम्मान को कम नहीं करता। संत समाज के लोग भी समाज का हिस्सा हैं और उनकी समस्याओं को सुनना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
“ऊपर वाला सब देख रहा है, आखिर अपने कर्मों का जवाब भी देना पड़ता है।”
उन्होंने कहा कि अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को यह नहीं सोचना चाहिए कि उनकी मनमानी को कोई देख नहीं रहा है। उन्होंने कहा कि पद और अधिकार स्थायी नहीं होते, लेकिन व्यक्ति के कर्म और उसका व्यवहार समाज की स्मृति में लंबे समय तक रहते हैं।
मंदिरों पर कब्जे और अराजकता पर सवाल
सम्मेलन में सुनीता मिश्रा ने गांवों में बने मंदिरों और धार्मिक स्थलों की स्थिति को लेकर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर मंदिरों की जमीन और परिसर पर कब्जे की कोशिशें होती हैं तथा कुछ धार्मिक स्थलों पर असामाजिक तत्वों का प्रभाव बढ़ रहा है।
उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मंदिर संतों और श्रद्धालुओं के लिए नहीं हैं तो आखिर किसके लिए हैं? उन्होंने कहा कि धार्मिक स्थलों पर रात के समय नशाखोरी और अन्य आपत्तिजनक गतिविधियों की शिकायतें सामने आना बेहद गंभीर विषय है। ऐसे मामलों में प्रशासन को केवल शिकायत आने का इंतजार नहीं करना चाहिए, बल्कि संवेदनशील धार्मिक स्थलों की नियमित निगरानी करनी चाहिए।
सुनीता मिश्रा ने प्रशासन से धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा, निगरानी और नियमित पुलिस गश्त सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
सुनीता मिश्रा ने मेजा तहसील क्षेत्र के बरम बाबा, शीतला माता मंदिर और पहरी महादेव मंदिर की व्यवस्था का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए प्रशासन से सवाल किया कि इन धार्मिक स्थलों पर शांति और सुरक्षा बनाए रखना किसकी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि यदि रात के समय इन स्थानों पर नशेड़ियों और असामाजिक तत्वों का जमावड़ा होता है तो इससे केवल श्रद्धालुओं को ही परेशानी नहीं होती, बल्कि आसपास से गुजरने वाले आम नागरिक भी खुद को असुरक्षित महसूस कर सकते हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि इन धार्मिक स्थलों पर नियमित पुलिस गश्त और निगरानी की व्यवस्था की जाए तथा मंदिर परिसरों को असामाजिक गतिविधियों से मुक्त कराया जाए। उनका कहना था कि मंदिर केवल पूजा-पाठ के स्थान नहीं हैं, बल्कि वे गांव और समाज की आस्था से जुड़े केंद्र होते हैं। इसलिए इनकी सुरक्षा और गरिमा बनाए रखना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है।
“संतों के साथ अन्याय समाज के लिए ठीक नहीं”
सम्मेलन के अंत में सुनीता मिश्रा ने कहा कि प्रभु का नाम लेने वाले और समाज को आध्यात्मिक दिशा देने वाले संतों के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि संतों का अपमान केवल किसी एक व्यक्ति का अपमान नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि इससे सामाजिक व्यवस्था और प्रशासन की छवि पर भी सवाल उठते हैं।
उन्होंने प्रशासन से मांग की कि धार्मिक स्थलों की स्थिति की समीक्षा की जाए, मंदिरों को अतिक्रमण और असामाजिक गतिविधियों से बचाया जाए तथा संतों और श्रद्धालुओं की शिकायतों को प्राथमिकता के साथ सुना जाए।
प्रशासन से कार्रवाई की मांग
सुनीता मिश्रा ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि धार्मिक स्थलों की गरिमा और संत समाज के सम्मान की रक्षा करना है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कदम उठाएगा, ताकि मंदिरों में श्रद्धालु सुरक्षित वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें और संत समाज को सम्मान के साथ अपनी धार्मिक गतिविधियां संचालित करने का अवसर मिले।
