शरद पूर्णिमा पर रायपुर में सजेगा आध्यात्मिक उत्सव,
शरद पूर्णिमा पर रायपुर में सजेगा आध्यात्मिक उत्सव, ‘आत्मानुभूति’ नृत्य नाटिका होगी खास आकर्षण
चार जैन संतों के मंगल सानिध्य में होगा भव्य आयोजन; भक्तामर पाठ, आचार्य पूजन, संत प्रवचन, महाआरती और डांडिया रास से सजेगा शरदोत्सव।
भक्ति, साधना और संस्कृति का होगा अनूठा संगम
आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के जीवन दर्शन पर आधारित ‘आत्मानुभूति’ कथक नृत्य नाटिका इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण होगी। श्रद्धालुओं को चार जैन संतों का मंगल सानिध्य और धर्म प्रवचनों का लाभ मिलेगा।
एक ही तिथि पर दो आचार्यों का अवतरण दिवस
सकल दिगम्बर जैन समाज, रायपुर के अध्यक्ष संजय जैन नायक और सचिव राजेश रज्जन जैन के अनुसार, इस आयोजन का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व है। शरद पूर्णिमा की पावन तिथि पर समाधिस्थ राष्ट्रसंत आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज और वर्तमान परंपराचार्य आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज का अवतरण दिवस मनाया जाता है।
इसी अवसर पर जैन समाज की ओर से गुरुद्वय अवतरण महापर्व श्रद्धा और उल्लास के साथ आयोजित किया जा रहा है। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का जीवन त्याग, तपस्या, आत्मसंयम, करुणा और आध्यात्मिक साधना का प्रेरक उदाहरण माना जाता है। उनके विचारों ने धर्म, शिक्षा, स्वदेशी और नैतिक जीवन जैसे विषयों पर अनेक लोगों को प्रेरित किया है।
उनके जीवन दर्शन पर आधारित सांस्कृतिक प्रस्तुति श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक मूल्यों को समझने और आत्मचिंतन की प्रेरणा देने का प्रयास करेगी।
चार जैन संतों का मिलेगा मंगल सानिध्य
शरदोत्सव में चार जैन संतों का मंगल सानिध्य प्राप्त होगा। संतों की उपस्थिति में श्रद्धालुओं को धार्मिक प्रवचनों, जिनवाणी और गुरुभक्ति का लाभ मिलेगा।
जैन परंपरा में संतों का सानिध्य आत्मचिंतन, संयम, अहिंसा और जीवन में सदाचार अपनाने की प्रेरणा का माध्यम माना जाता है। आयोजकों का उद्देश्य नई पीढ़ी को भी जैन धर्म के मूल सिद्धांतों और आचार्य परंपरा से परिचित कराना है।
दोपहर 12:30 बजे भक्तामर पाठ से होगी शुरुआत
शरदोत्सव के तहत धार्मिक कार्यक्रमों की शुरुआत दोपहर 12:30 बजे प्रथम तीर्थंकर भगवान आदिनाथ की स्तुति और श्री भक्तामर स्तोत्र के संगीतमय मंगलपाठ से होगी। इसके बाद आचार्य पूजन, नृत्य प्रतियोगिता और समाजसेवियों के सम्मान जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
दिनभर के कार्यक्रमों की समय-सारणी
धार्मिक अनुष्ठानों से लेकर शाम की महाआरती तक, आयोजन में श्रद्धालुओं के लिए विभिन्न आध्यात्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां रखी गई हैं।
भगवान आदिनाथ की स्तुति एवं भक्तामर पाठ
संगीतमय मंगलपाठ के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का शुभारंभ होगा।
आचार्य पूजन और नृत्य प्रतियोगिता
छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिनालयों के बहु-मंडलों की ओर से प्रस्तुतियां दी जाएंगी।
अलंकरण एवं सम्मान समारोह
समाज के सेवाभावी सदस्यों और विशिष्ट योगदानकर्ताओं का सम्मान किया जाएगा।
आरती सजाओ प्रतियोगिता
श्रद्धालु अपनी कलात्मक प्रतिभा और भक्ति भावना प्रस्तुत करेंगे।
चित्र अनावरण, दीप प्रज्वलन एवं मंगलाचरण
विद्वान वक्ताओं के उद्बोधन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आगे बढ़ेंगे।
संतों के मंगल प्रवचन
श्रद्धालुओं को संतों की वाणी और आध्यात्मिक विचारों का लाभ मिलेगा।
स्वामीवात्सल्य प्रीतिभोज
श्रद्धालु सामूहिक सहभोज में शामिल होंगे।
भव्य महाआरती, भजन और डांडिया रास
सजी हुई आरतियों के साथ महाआरती, भक्ति गीत और सांस्कृतिक उल्लास देखने को मिलेगा।
कृतज्ञता ज्ञापन एवं समापन
आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन होगा।
‘आत्मानुभूति’ नृत्य नाटिका होगी खास आकर्षण
इस महोत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के जीवन दर्शन पर आधारित कथक नृत्य नाटिका ‘आत्मानुभूति’ होगी। सुप्रसिद्ध कथक कलाकारों की ओर से प्रस्तुत की जाने वाली यह नृत्य नाटिका आध्यात्मिक विचारों और जीवन मूल्यों को कला के माध्यम से सामने लाएगी।
कथक की भावाभिव्यक्ति, संगीत और नृत्य के जरिए आचार्य श्री के साधनामय जीवन को प्रस्तुत करने का प्रयास किया जाएगा। दर्शकों को इस प्रस्तुति के माध्यम से त्याग, आत्मसंयम, करुणा और आत्मचिंतन जैसे मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिलेगा।
क्यों खास है ‘आत्मानुभूति’?
यह प्रस्तुति धर्म और कला के संगम को सामने लाएगी। आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के जीवन दर्शन को नृत्य और भावों के माध्यम से समझने का यह एक विशेष सांस्कृतिक अवसर होगा।
नृत्य नाटिका के साथ विद्वान वक्ताओं के उद्बोधन और संतों के मंगल प्रवचन कार्यक्रम को आध्यात्मिक दृष्टि से और महत्वपूर्ण बनाएंगे।
महाआरती, भजन और डांडिया रास से सजेगी शाम
धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बाद शाम 5 बजे स्वामीवात्सल्य प्रीतिभोज का आयोजन किया जाएगा। इसमें श्रद्धालु सामूहिक सहभोज का लाभ लेंगे। जैन परंपरा में स्वामीवात्सल्य को परस्पर स्नेह, सेवा और सामाजिक एकता की भावना से जोड़ा जाता है।
शाम 6:30 बजे प्रतियोगिताओं में सजाई गई आरतियों के साथ भव्य महाआरती होगी। इसके बाद भक्तिमय भजनों और डांडिया रास से आयोजन का वातावरण उल्लासपूर्ण बनेगा। धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का यह मेल शरदोत्सव को विशेष स्वरूप देगा।
रात्रि 8 बजे कृतज्ञता ज्ञापन एवं आभार प्रदर्शन के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा।
कहां और कब होगा शरदोत्सव?
सकल दिगम्बर जैन समाज ने की सपरिवार शामिल होने की अपील
सकल दिगम्बर जैन समाज, रायपुर ने छत्तीसगढ़ के सभी जैन एवं जैनेतर धर्मप्रेमियों, श्रावक-श्राविकाओं और श्रद्धालुओं से इस महापर्व में सपरिवार शामिल होने की अपील की है।
आयोजकों के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य गुरुभक्ति, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है। संतों का सानिध्य, आचार्य परंपरा का स्मरण और कला के जरिए आध्यात्मिक संदेश इस महोत्सव को विशेष बनाएंगे।
शरदोत्सव की मुख्य बातें
- 25 अक्टूबर 2026 को रायपुर में होगा भव्य आयोजन।
- चार जैन संतों का मंगल सानिध्य प्राप्त होगा।
- भक्तामर पाठ और आचार्य पूजन से होगी कार्यक्रमों की शुरुआत।
- ‘आत्मानुभूति’ कथक नृत्य नाटिका होगी मुख्य आकर्षण।
- शाम को महाआरती, भजन और डांडिया रास का आयोजन होगा।
- रात्रि 8 बजे कृतज्ञता ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न होगा।
निष्कर्ष: रायपुर का शरदोत्सव वर्ष 2026 धार्मिक आस्था, गुरुभक्ति और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का एक विशेष अवसर बनने जा रहा है। ‘आत्मानुभूति’ नृत्य नाटिका से लेकर संतों के मंगल प्रवचन और भव्य महाआरती तक, आयोजन में श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन और सामूहिक सहभागिता का अवसर मिलेगा।
