फल्गु में फव्वारों से होगा धार्मिक महत्व का प्रदर्शन
पितृपक्ष में पहली बार लेजर लाइट शो से दिखेगा गया जी का इतिहास, फल्गु में फव्वारों से होगा धार्मिक महत्व का प्रदर्शन
पितृपक्ष मेला 2026 में श्रद्धालुओं को धार्मिक अनुष्ठानों के साथ गया जी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के जरिए देखने का अवसर मिलेगा।
लेजर लाइट शो
गया जी के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को प्रकाश आधारित प्रस्तुति के जरिए दिखाने की तैयारी।
फल्गु नदी में फव्वारे
फल्गु नदी में फव्वारों के माध्यम से धार्मिक महत्व से जुड़ी प्रस्तुति आकर्षक तरीके से दिखाने की योजना।
पितृपक्ष मेला
देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सफाई, पेयजल और प्रकाश व्यवस्था पर जोर।
पहली बार आधुनिक तकनीक से दिखेगी गयाजी की विरासत
गया को पितरों के तर्पण और पिंडदान के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है। पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं। ऐसे में प्रशासन और नगर निगम इस बार मेले को केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित रखने के बजाय श्रद्धालुओं के लिए जानकारी और अनुभव से जोड़ने की तैयारी में जुटे हैं।
नगर निगम बोर्ड की बैठक में बताया गया कि लेजर लाइट शो के जरिए गया जी की धार्मिक एवं ऐतिहासिक पहचान को दृश्य माध्यम से सामने लाया जाएगा। इसके साथ फल्गु नदी में फव्वारों के माध्यम से भी प्रस्तुति की योजना है। इससे शाम के समय मेला क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालुओं को गया की विरासत को एक अलग अंदाज में देखने का अवसर मिल सकता है।
इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र गया जी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान को आधुनिक दृश्य माध्यमों के जरिए श्रद्धालुओं तक पहुंचाना है।
सीताकुंड क्षेत्र में भी लेजर शो की तैयारी
गया जिला प्रशासन की वेबसाइट पर सीताकुंड के पीछे पहाड़ पर पितृपक्ष मेला महोत्सव से संबंधित लेजर लाइट शो के संचालन के लिए निविदा का रिकॉर्ड भी उपलब्ध है। इससे पता चलता है कि मेले के दौरान प्रकाश आधारित प्रस्तुति को लेकर प्रशासनिक स्तर पर व्यवस्था की जा रही है।
इस वर्ष मेला क्षेत्र में प्रकाश व्यवस्था को बेहतर करने पर भी जोर दिया जा रहा है। तैयारियों के तहत अंधेरे वाले स्थानों पर स्ट्रीट लाइट और भीड़ वाले स्थानों पर हाइमास्ट तथा मिनी हाइमास्ट लगाने की बात सामने आई है। रामकुंड, गोदावरी, ब्रह्मसत्य और वैतरणी क्षेत्र के मिनी झरनों को दुरुस्त करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
पितृपक्ष मेले में धार्मिक आस्था के साथ गया जी की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से सामने लाने की कोशिश की जा रही है।
सफाई से लेकर पेयजल तक पर जोर
पितृपक्ष मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए नगर निगम ने सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता में रखा है। मेयर के अनुसार मेला क्षेत्र में सफाई, पेयजल, रोशनी, सड़क और नालियों की मरम्मत सहित जरूरी सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
कचरे से दुर्गंध न फैले, इसके लिए कचरे पर इत्र का छिड़काव कराने और कचरे की ढुलाई पूरी तरह ढककर करने की व्यवस्था की बात कही गयी है। इससे धार्मिक स्थलों और मेला क्षेत्र में स्वच्छता बनाए रखने का प्रयास किया जाएगा।
श्रद्धालुओं को उमसभरी गर्मी से राहत देने के लिए मेला क्षेत्र में शीतल पेयजल की व्यवस्था करने की भी बात कही गयी है। प्रशासनिक तैयारियों में अस्थायी पनशालाओं और प्याऊ की व्यवस्था का भी उल्लेख किया गया है।
सुरक्षा व्यवस्था भी रहेगी मजबूत
पितृपक्ष मेला 2026 के दौरान सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन को लेकर भी प्रशासन तैयारी कर रहा है। जिला प्रशासन ने मेले के क्षेत्र में अस्थायी CCTV कैमरे, ड्रोन कैमरे, वीडियो कैमरे, स्मार्ट टीवी और कंप्यूटर सिस्टम लगाने से संबंधित निविदा जारी की है।
सरकारी सूचना के अनुसार सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के दृष्टिकोण से ये व्यवस्थाएं मेला क्षेत्र में की जानी हैं। जिला प्रशासन के रिकॉर्ड के अनुसार पितृपक्ष मेला 2026 के लिए CCTV और ड्रोन कैमरों से जुड़ी व्यवस्था की अवधि 25 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक रखी गयी है।
📌 श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख व्यवस्थाएं
सफाई व्यवस्था, पेयजल, रोशनी, सड़क एवं नाली की मरम्मत, सुरक्षा निगरानी, CCTV, ड्रोन कैमरे और प्रकाश आधारित कार्यक्रमों को लेकर तैयारियां की जा रही हैं।
44 नई लाइब्रेरी बनाने की भी योजना
नगर निगम की बैठक में केवल पितृपक्ष मेले की व्यवस्थाओं पर ही चर्चा नहीं हुई। सशक्त स्थायी समिति के सदस्य डॉ. अखौरी ओंकार नाथ उर्फ मोहन श्रीवास्तव के अनुसार 16 स्थानों पर लाइब्रेरी निर्माण का काम पूरा हो चुका है, जबकि 44 अन्य स्थानों पर करीब 15 लाख रुपये की लागत से लाइब्रेरी निर्माण का काम शुरू करने की तैयारी है।
नगर निगम के अनुसार इन लाइब्रेरी का उद्देश्य स्थानीय बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधा उपलब्ध कराना है। इससे मेला तैयारियों के साथ शहर में नागरिक सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों पर भी ध्यान केंद्रित होने की जानकारी मिलती है।
खुले में मांस-मछली की बिक्री पर भी चर्चा
बैठक में शहर की स्वच्छता और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़े मुद्दे भी उठे। नगर आयुक्त की ओर से रखे गए प्रस्ताव पर सदस्यों ने खुले में मांस-मछली की बिक्री को लेकर आपत्ति जतायी।
सदस्यों ने कहा कि जहां ऐसी बिक्री होती है, वहां दुकानों पर पर्दे की व्यवस्था होनी चाहिए और अवैध रूप से संचालित दुकानों के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत है। बैठक में इस मुद्दे को शहर की स्वच्छता और सार्वजनिक व्यवस्था से जोड़कर देखा गया।
डीजल मामले में जांच शुरू
नगर निगम में डीजल हेराफेरी से जुड़े मामले पर भी बैठक में सवाल उठे। नगर आयुक्त डॉ. गगन ने बताया कि जानकारी मिलने के बाद संबंधित स्वच्छता पदाधिकारी और डीजल सहायक के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गयी है।
जांच के लिए गठित कमेटी के माध्यम से मामले से जुड़े दस्तावेज तैयार किए जाने की बात भी कही गयी। मामले की जांच और संबंधित कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने की जानकारी बैठक में दी गयी।
धार्मिक आस्था और आधुनिक प्रस्तुति का संगम
पितृपक्ष मेला गया की धार्मिक पहचान का प्रमुख हिस्सा है। इस बार लेजर लाइट शो, फव्वारों और बेहतर प्रकाश व्यवस्था के जरिए श्रद्धालुओं को गया जी की कहानी और विरासत से जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
इसके साथ सफाई, पेयजल, सुरक्षा और यात्री सुविधाओं पर भी प्रशासनिक तैयारियां जारी हैं। ऐसे में पितृपक्ष के दौरान गया पहुंचने वाले श्रद्धालुओं के लिए इस बार पिंडदान और तर्पण की पारंपरिक आस्था के साथ गया जी के इतिहास और धार्मिक विरासत को आधुनिक दृश्य माध्यमों से देखने का अनुभव भी जुड़ सकता है।
पितृपक्ष के दौरान गया में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान देशभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं। इस बार प्रशासनिक तैयारियों में धार्मिक महत्व के साथ-साथ विरासत को दृश्य माध्यम से प्रस्तुत करने पर भी जोर दिखाई दे रहा है।
यह समाचार उपलब्ध रिपोर्ट और गया जिला प्रशासन के सार्वजनिक रिकॉर्ड में उपलब्ध पितृपक्ष मेला 2026 से संबंधित सूचनाओं के आधार पर तैयार किया गया है।
संदर्भ: गया जिला प्रशासन
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