कुंभ मेला 2027 से पहले हरिद्वार में पेयजल व्यवस्था को बड़ा बूस्ट

हरिद्वार में कुंभ की तैयारी शुरू

कुंभ मेला 2027 से पहले हरिद्वार में पेयजल व्यवस्था को बड़ा बूस्ट, 39 करोड़ से ज्यादा की योजनाओं पर काम तेज
उत्तराखंड • हरिद्वार • कुंभ मेला 2027

कुंभ मेला 2027 से पहले हरिद्वार में पेयजल व्यवस्था को बड़ा बूस्ट, 39 करोड़ से ज्यादा की योजनाओं पर काम तेज

श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए नई पाइपलाइन, ट्यूबवेल, ओवरहेड टैंक और पंपिंग व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
📍 हरिद्वार 🗓️ कुंभ मेला 2027 💧 पेयजल व्यवस्था 📰 विशेष रिपोर्ट
हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान गंगा घाट पर श्रद्धालु
हरिद्वार में कुंभ मेले के दौरान गंगा घाट पर श्रद्धालुओं की भीड़ — सांकेतिक तस्वीर
हरिद्वार: कुंभ मेला 2027 को देखते हुए हरिद्वार में पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी गई है। मेला क्षेत्र में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या और अतिरिक्त पानी की मांग को देखते हुए नई पेयजल लाइनें, ट्यूबवेल, ओवरहेड टैंक और पंपिंग व्यवस्था विकसित की जा रही है। शहर की मौजूदा जल वितरण प्रणाली को भी मजबूत करने पर काम चल रहा है।
₹9.69 करोड़ शहर की जल वितरण व्यवस्था के लिए विभिन्न कार्य
₹29.39 करोड़ मेला क्षेत्र की 35 पेयजल योजनाएं
9.5 KM लगभग नई पेयजल पाइपलाइन

कुंभ मेला 2027 से पहले पेयजल व्यवस्था पर फोकस

हरिद्वार में होने वाला कुंभ मेला देश और दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन है। ऐसे बड़े आयोजन के दौरान शहर की आधारभूत सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। इनमें पेयजल व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण सुविधाओं में शामिल होती है।

इसी को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार नगर और मेला क्षेत्र में जलापूर्ति व्यवस्था को मजबूत करने का काम किया जा रहा है। नई पाइपलाइन बिछाने से लेकर पुराने नेटवर्क को बदलने तक कई स्तरों पर काम जारी है। इसका उद्देश्य मेला अवधि के दौरान पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ शहर के स्थानीय लोगों को भी बेहतर जलापूर्ति देना है।

खास बात: कुंभ के लिए तैयार किया जा रहा जल ढांचा केवल मेला अवधि तक सीमित नहीं रहेगा। नई पाइपलाइन, ट्यूबवेल और जल भंडारण सुविधाएं भविष्य में भी हरिद्वार की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने में उपयोगी हो सकती हैं।

शहर में बिछाई जा रही करीब 9.5 किलोमीटर नई पाइपलाइन

हरिद्वार नगर की जल वितरण व्यवस्था के सुदृढ़ीकरण के लिए लगभग 5.61 करोड़ रुपये की लागत से करीब साढ़े नौ किलोमीटर नई पेयजल लाइनें बिछाई जा रही हैं। शहर के कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों को इन कार्यों में शामिल किया गया है।

सप्त ऋषि रोड, दूधाधारी चौक से शांतिकुंज तक, ब्रह्मपुरी-मनसा देवी मार्ग, बिल्केश्वर कॉलोनी और कनखल क्षेत्र में पाइपलाइन से जुड़े कार्य चल रहे हैं। कनखल में बंगाली हॉस्पिटल से कनखल थाना तक नई लाइन बिछाने और पुरानी लाइनों को बदलने का काम भी किया जा रहा है।

जिन प्रमुख क्षेत्रों में काम:
  • सप्त ऋषि रोड
  • दूधाधारी चौक से शांतिकुंज
  • ब्रह्मपुरी-मनसा देवी मार्ग
  • बिल्केश्वर कॉलोनी
  • कनखल क्षेत्र
  • बंगाली हॉस्पिटल से कनखल थाना मार्ग

पुरानी पाइपलाइनों को बदलने पर भी जोर

हरिद्वार में जल वितरण नेटवर्क का एक हिस्सा पुरानी पाइपलाइनों पर निर्भर है। समय के साथ पुरानी लाइनों में लीकेज, कम दबाव और दूसरी तकनीकी समस्याएं सामने आ सकती हैं। ऐसे में नई पाइपलाइन बिछाने के साथ पुरानी लाइनों को बदलना भी इस परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

नई पाइपलाइन व्यवस्था पूरी होने के बाद पानी की आपूर्ति क्षमता में सुधार होने और जल वितरण नेटवर्क से जुड़ी कुछ समस्याओं को कम करने की उम्मीद है।

पंपिंग पेयजल आपूर्ति व्यवस्था भी होगी मजबूत

केवल पाइपलाइन बिछा देना पर्याप्त नहीं है। पानी को जल स्रोतों से उठाकर अलग-अलग क्षेत्रों तक पहुंचाने के लिए मजबूत पंपिंग व्यवस्था भी आवश्यक है। इसी को देखते हुए पंपिंग पेयजल आपूर्ति योजनाओं के पुनर्गठन पर काम किया जा रहा है।

भूपतवाला पावन धाम पंपिंग पेयजल आपूर्ति योजना का पुनर्गठन पूरा हो चुका है। वहीं प्राथमिक विद्यालय और श्यामलोक पंपिंग पेयजल आपूर्ति योजना का पुनर्गठन अंतिम चरण में बताया गया है।

💧 मजबूत पंपिंग व्यवस्था का उद्देश्य जल स्रोतों से पानी उठाने और उसे निर्धारित क्षेत्रों तक प्रभावी तरीके से पहुंचाने की क्षमता को बेहतर बनाना है।

मेला क्षेत्र में 29.39 करोड़ रुपये की 35 योजनाएं

कुंभ मेला क्षेत्र में अतिरिक्त पेयजल मांग को पूरा करने के लिए लगभग 29.39 करोड़ रुपये की 35 योजनाओं पर काम किया जा रहा है। इन योजनाओं में नए जल स्रोत विकसित करने, पानी के भंडारण और वितरण नेटवर्क को मजबूत करने जैसे काम शामिल हैं।

बैरागी कैंप में 1500 किलोलीटर क्षमता वाले ओवरहेड टैंक का निर्माण अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इसके अलावा दो ट्यूबवेल का निर्माण भी किया जा रहा है।

लालजीवाला और अन्य क्षेत्रों में इन्फिल्ट्रेशन वेल

जल उपलब्धता बढ़ाने के लिए लालजीवाला, दक्षद्वीप, गौरीशंकर और पंतद्वीप में पांच आरसीसी इन्फिल्ट्रेशन वेल का निर्माण कराया जा रहा है। इनका निर्माण भी अंतिम चरण में बताया गया है।

इन जल स्रोतों के अलावा दक्षद्वीप, बजरीवाला, सतीद्वीप और बीएचईएल क्षेत्र में पांच ट्यूबवेल के निर्माण का काम भी जारी है।

सात स्थानों पर मिनी ट्यूबवेल की तैयारी

मेला क्षेत्र के सात अलग-अलग स्थानों पर मिनी ट्यूबवेल विकसित करने और उनकी सफाई का काम भी कराया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर पानी उपलब्ध कराने की व्यवस्था को अतिरिक्त सहारा मिलने की उम्मीद है।

🚰 पेयजल व्यवस्था में शामिल प्रमुख कार्य

  • नई पेयजल पाइपलाइन का निर्माण
  • पुरानी पाइपलाइनों का प्रतिस्थापन
  • नए ट्यूबवेल का निर्माण
  • मिनी ट्यूबवेल विकसित करना
  • 1500 किलोलीटर क्षमता वाले ओवरहेड टैंक का निर्माण
  • आरसीसी इन्फिल्ट्रेशन वेल का निर्माण
  • पुरानी पेयजल योजनाओं की मरम्मत और रखरखाव
  • पंपिंग व्यवस्था का पुनर्गठन

पहले से बनी 10 योजनाओं की भी मरम्मत

नई योजनाओं के साथ मेला क्षेत्र में पहले से मौजूद पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को भी दुरुस्त किया जा रहा है। पहले से बनी 10 पेयजल आपूर्ति योजनाओं की मरम्मत और रखरखाव का काम जारी है।

इन कार्यों को अगले माह तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। मौजूदा योजनाओं को बेहतर स्थिति में रखने से मेला अवधि में तकनीकी समस्याओं की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है।

एफजीआई और राइजिंग मेन पाइपलाइन का काम अंतिम चरण में

मेला क्षेत्र से हरिद्वार शहर तक पेयजल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए एफजीआई पाइपलाइन बदलने और राइजिंग मेन पाइपलाइन बिछाने का काम भी जारी है।

हरिद्वार पेयजल आपूर्ति योजना के तहत लालजीवाला इंटेक वेल से भूपतवाला के पावन धाम ओवरहेड टैंक और सूखी नदी तक राइजिंग मेन तथा वितरण नेटवर्क के प्रतिस्थापन का काम अंतिम चरण में बताया गया है।

श्रद्धालुओं के साथ स्थानीय लोगों को भी फायदा

कुंभ मेले के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के हरिद्वार पहुंचने की संभावना रहती है। ऐसे में पेयजल की मांग सामान्य दिनों की तुलना में काफी बढ़ सकती है। श्रद्धालुओं के साथ शिविरों, भोजन व्यवस्था और अन्य सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भी पानी की आवश्यकता होगी।

इसलिए मेला क्षेत्र में तैयार किया जा रहा मजबूत जल नेटवर्क आयोजन के दौरान महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। साथ ही, नई पाइपलाइन, ओवरहेड टैंक, ट्यूबवेल और पंपिंग व्यवस्था का फायदा भविष्य में स्थानीय आबादी को भी मिल सकता है।

समय पर काम पूरा करने पर जोर

कुंभ मेला 2027 की तैयारियों के तहत पेयजल से जुड़ी परियोजनाओं की नियमित समीक्षा की जा रही है। अंतिम चरण में पहुंच चुके कार्यों को समय पर पूरा करने और निर्माणाधीन योजनाओं की गति बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।

बड़े धार्मिक आयोजन की सफलता के लिए केवल धार्मिक और सांस्कृतिक व्यवस्थाएं ही महत्वपूर्ण नहीं होतीं, बल्कि पानी, स्वच्छता, स्वास्थ्य, यातायात और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में हरिद्वार की पेयजल व्यवस्था को मजबूत करने के लिए चल रहे ये कार्य व्यापक तैयारियों का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

कुंभ मेला 2027 से पहले हरिद्वार में पेयजल नेटवर्क को मजबूत करने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है। शहर में करीब साढ़े नौ किलोमीटर नई पाइपलाइन बिछाने से लेकर मेला क्षेत्र में 35 योजनाओं पर काम जारी है।

नए ट्यूबवेल, इन्फिल्ट्रेशन वेल, ओवरहेड टैंक, पंपिंग व्यवस्था और पुरानी योजनाओं के रखरखाव से कुंभ के दौरान पेयजल की बढ़ती मांग को पूरा करने की क्षमता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।

इन परियोजनाओं का असर केवल कुंभ तक सीमित रहने के बजाय हरिद्वार की दीर्घकालीन जलापूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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