इस साल कब मनाई जाएगी गोवर्धन पूजा?
गोवर्धन पूजा 2026: इस साल कब मनाया जाएगा पर्व? जानें सही डेट और शुभ मुहूर्त
भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला, अन्नकूट की परंपरा और पूजा-विधि के साथ जानिए इस पर्व का धार्मिक महत्व।
Govardhan Puja 2026: हिंदू धर्म में कार्तिक माह का विशेष महत्व है। इस महीने में दीपावली, गोवर्धन पूजा, भाई दूज और कई अन्य त्योहार मनाए जाते हैं। गोवर्धन पूजा भगवान श्रीकृष्ण, गोवर्धन पर्वत और गौसेवा को समर्पित पर्व है। इसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है।
दीपावली के उत्सव के आसपास मनाए जाने वाले इस पर्व पर भक्त भगवान श्रीकृष्ण को विभिन्न प्रकार के सात्विक व्यंजनों का भोग लगाते हैं। कई स्थानों पर गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति बनाई जाती है और उसकी पूजा तथा परिक्रमा की जाती है। यह पर्व प्रकृति, अन्न और पशुधन के प्रति आभार व्यक्त करने का संदेश देता है।
गोवर्धन पूजा 2026 कब है?
हिंदू पंचांग के अनुसार गोवर्धन पूजा कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में यह पर्व मंगलवार, 10 नवंबर को मनाया जाएगा। आम तौर पर इसे दीपावली के अगले दिन मनाने की परंपरा है, लेकिन पंचांग की तिथियों के कारण कुछ वर्षों में त्योहारों के बीच अंतर हो सकता है।
गोवर्धन पूजा 2026
मंगलवार, 10 नवंबर 2026 · कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा
दिए गए पंचांग विवरण के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 9 नवंबर को दोपहर 12:31 बजे शुरू होकर 10 नवंबर को दोपहर लगभग 2 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर 10 नवंबर को पूजा का दिन माना गया है। अपने शहर में तिथि और समय की पुष्टि स्थानीय पंचांग से अवश्य करें।
गोवर्धन पूजा 2026 का शुभ मुहूर्त
गोवर्धन पूजा के दौरान भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा शुभ समय में करने की परंपरा है। दिए गए समय के अनुसार, दिल्ली के लिए प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त इस प्रकार है:
| विवरण | तिथि और समय |
|---|---|
| गोवर्धन पूजा | 10 नवंबर 2026, मंगलवार |
| प्रतिपदा तिथि प्रारंभ | 9 नवंबर, दोपहर 12:31 बजे |
| प्रतिपदा तिथि समाप्त | 10 नवंबर, दोपहर लगभग 2:00 बजे |
| प्रातःकालीन पूजा मुहूर्त | सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक |
गोवर्धन पूजा का धार्मिक महत्व
गोवर्धन पूजा का संबंध भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध लीला से है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ब्रजवासी वर्षा के देवता इंद्र की पूजा करते थे। भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें समझाया कि जीवन के लिए प्रकृति, पर्वत, वनस्पति, जल, अन्न और पशुधन का बहुत महत्व है। इसलिए इनसे मिलने वाले लाभों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए।
भगवान श्रीकृष्ण ने क्यों उठाया गोवर्धन पर्वत?
पौराणिक कथा के अनुसार, इंद्र देव ने ब्रज में तेज वर्षा शुरू कर दी। ब्रजवासियों और उनके पशुओं की रक्षा के लिए भगवान श्रीकृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठा लिया। मान्यता है कि सात दिनों तक ब्रजवासी पर्वत के नीचे सुरक्षित रहे। अंत में इंद्र देव को भगवान श्रीकृष्ण की महिमा का एहसास हुआ। इसी लीला की स्मृति में गोवर्धन पूजा की जाती है।
यह कथा प्रकृति के संरक्षण, अहंकार से दूर रहने और समुदाय की रक्षा के संदेश से भी जुड़ी है। गोवर्धन पूजा के माध्यम से भक्त भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं और प्रकृति के महत्व को याद करते हैं।
गोवर्धन पूजा और अन्नकूट का संबंध
‘अन्नकूट’ का अर्थ है अन्न का ढेर या अन्न का पर्वत। इस दिन घरों और मंदिरों में अनेक प्रकार के सात्विक पकवान, मिठाइयां, सब्जियां और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार करके भगवान श्रीकृष्ण को अर्पित किए जाते हैं। कई मंदिरों में छप्पन भोग लगाने की परंपरा भी है। भोग की सामग्री और व्यंजनों की संख्या अलग-अलग क्षेत्रों और मंदिरों में भिन्न हो सकती है।
अन्नकूट का संदेश है कि अन्न जीवन का आधार है। किसान, धरती, वर्षा और प्रकृति की भूमिका को सम्मान देना इस उत्सव की प्रमुख भावना है। पूजा के बाद प्रसाद भक्तों और जरूरतमंदों में बांटने की परंपरा भी कई जगह निभाई जाती है।
गोवर्धन पूजा कैसे करें?
गोवर्धन पूजा की विधि परिवार और क्षेत्र की परंपराओं के अनुसार अलग हो सकती है। सामान्य रूप से पूजा इस तरह की जाती है:
- पूजा स्थल की सफाई करेंघर के आंगन या पूजा स्थल को साफ करके पूजा की तैयारी करें।
- गोवर्धन की आकृति बनाएंपरंपरा के अनुसार गोबर से गोवर्धन पर्वत की प्रतीकात्मक आकृति बनाएं।
- भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करेंफूल, दीपक, धूप और अपनी परंपरा के अनुसार पूजन सामग्री अर्पित करें।
- अन्नकूट का भोग लगाएंफल, मिठाइयां और सात्विक पकवान श्रद्धापूर्वक अर्पित करें।
- परिक्रमा और प्रार्थना करेंस्थानीय परंपरा तथा सुविधा के अनुसार परिक्रमा करके परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
- गौसेवा और दान करेंगायों को चारा खिलाएं, पशुओं की देखभाल करें और जरूरतमंदों की मदद करें।
गोवर्धन पूजा हमें क्या संदेश देती है?
गोवर्धन पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि प्रकृति और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने वाला पर्व भी है। यह हमें याद दिलाता है कि पर्वत, नदियां, पेड़-पौधे, मिट्टी और पशुधन हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं। इनका संरक्षण करना और प्राकृतिक संसाधनों का समझदारी से उपयोग करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
इस अवसर पर अन्न का सम्मान करने, भोजन की बर्बादी रोकने, पशुओं की देखभाल करने और जरूरतमंदों को भोजन कराने का संकल्प लिया जा सकता है। भगवान श्रीकृष्ण की गोवर्धन लीला हमें प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर रहने की प्रेरणा देती है।
गोवर्धन पूजा 2026 के लिए दी गई जानकारी के अनुसार तारीख 10 नवंबर, मंगलवार है। दिल्ली के लिए बताया गया प्रातःकालीन मुहूर्त सुबह 6:40 से 8:50 बजे तक है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा, अन्नकूट का भोग और गौसेवा की जाती है। पर्व को श्रद्धा के साथ मनाते हुए प्रकृति, अन्न और पशुधन के महत्व को समझना ही इसका मुख्य संदेश है।
