पुरी जगन्नाथ मंदिर में दिव्यांग भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी,
पुरी जगन्नाथ मंदिर में दिव्यांग भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी, रोज 20 को मिलेगा विशेष दर्शन का मौका; ऐसे होगी बुकिंग
महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के दर्शन को और अधिक सुगम बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल। ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग से दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन का अवसर देने की तैयारी।
पुरी: विश्वप्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के दर्शन की इच्छा रखने वाले दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए राहत देने वाली पहल की तैयारी की जा रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रतिदिन 20 दिव्यांग भक्तों को विशेष दर्शन का अवसर मिलेगा। इसके लिए ऑनलाइन पंजीकरण और स्लॉट बुकिंग की सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांग श्रद्धालुओं को मंदिर में दर्शन के दौरान होने वाली शारीरिक कठिनाइयों से राहत देना है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रतिदिन पुरी पहुंचते हैं। ऐसे में भीड़ और लंबी कतारों के कारण चलने-फिरने में असमर्थ या व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले भक्तों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। नई व्यवस्था इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए तैयार की जा रही है।
विशेष दर्शन व्यवस्था की प्रमुख बातें
- प्रतिदिन 20 दिव्यांग भक्तों को विशेष दर्शन का अवसर मिलेगा।
- बुकिंग के लिए अलग वेबसाइट तैयार करने की योजना है।
- पंजीकरण और स्लॉट बुकिंग ऑनलाइन होगी।
- एक भक्त छह महीने में एक बार सुविधा का लाभ ले सकेगा।
- उत्तर द्वार से व्हीलचेयर के माध्यम से प्रवेश की व्यवस्था होगी।
- बैटरी चालित वाहन से मंदिर के पास तक पहुंचाने की योजना है।
- सुरक्षा के साथ चिकित्सा दल की व्यवस्था भी रहेगी।
रोज 20 दिव्यांग भक्तों को मिलेगा विशेष दर्शन
नई व्यवस्था के तहत सामान्य दिनों में प्रतिदिन अधिकतम 20 दिव्यांग श्रद्धालुओं को विशेष दर्शन का अवसर दिया जाएगा। सीमित संख्या रखने का उद्देश्य दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित रखना और प्रत्येक चयनित श्रद्धालु को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना है।
इस सुविधा का लाभ बार-बार नहीं लिया जा सकेगा। प्रस्ताव के अनुसार एक दिव्यांग भक्त छह महीने में केवल एक बार इस विशेष दर्शन व्यवस्था का लाभ उठा सकेगा। इससे अधिक संख्या में श्रद्धालुओं को सुविधा देने का रास्ता खुलेगा।
ऑनलाइन होगी स्लॉट बुकिंग
दिव्यांग भक्तों की सुविधा के लिए विशेष वेबसाइट तैयार की जाएगी। इसी वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन पंजीकरण और दर्शन के लिए स्लॉट बुक करने की सुविधा दी जाएगी। पंजीकरण के दौरान आवश्यक जानकारी और निर्धारित विवरण उपलब्ध कराने होंगे।
आवेदन और पंजीकरण की पुष्टि होने के बाद संबंधित श्रद्धालु को संदेश के माध्यम से सूचना दी जाएगी। इससे भक्त को पहले ही पता चल सकेगा कि उसे किस दिन दर्शन के लिए पुरी पहुंचना है।
ऐसे हो सकती है विशेष दर्शन की प्रक्रिया
ऑनलाइन पंजीकरण
आधिकारिक विशेष दर्शन वेबसाइट शुरू होने के बाद दिव्यांग श्रद्धालु अपना पंजीकरण कर सकेंगे।
स्लॉट का चयन
उपलब्ध तिथियों के आधार पर दर्शन का स्लॉट चुना जा सकेगा।
पुष्टि संदेश
पंजीकरण की पुष्टि होने के बाद संबंधित भक्त को संदेश भेजकर जानकारी दी जाएगी।
निर्धारित दिन पुरी पहुंचना
श्रद्धालु को स्वीकृत तिथि के अनुसार निर्धारित स्थान पर पहुंचना होगा।
विशेष दर्शन
सहायता और निर्धारित व्यवस्था के तहत भक्त को मंदिर के भीतर महाप्रभु के दर्शन कराए जाएंगे।
बैटरी वाहन से उत्तर द्वार तक पहुंचेंगे श्रद्धालु
निर्धारित तिथि पर पुरी पहुंचने वाले दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए सत्यनारायण मंदिर के पास से श्रीमंदिर तक पहुंचने की व्यवस्था किए जाने की योजना है। यहां से बैटरी चालित वाहन के माध्यम से उन्हें मंदिर के उत्तर द्वार तक पहुंचाया जाएगा।
उत्तर द्वार के पास रैंप की सुविधा होने के कारण व्हीलचेयर का उपयोग करने वाले भक्तों के लिए मंदिर में प्रवेश आसान होगा। यह व्यवस्था उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी, जिन्हें लंबी दूरी पैदल तय करने में परेशानी होती है।
स्वयंसेवक करेंगे मंदिर के अंदर सहायता
उत्तर द्वार से प्रवेश के बाद दिव्यांग भक्तों को घंटिद्वार तक पहुंचाया जाएगा। यहां स्वयंसेवक उनकी सहायता करेंगे और उन्हें मंदिर के अंदर निर्धारित मार्ग से आगे ले जाएंगे।
प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार श्रद्धालुओं को जय-विजय द्वार के पास से महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के दर्शन कराए जाएंगे। इस दौरान पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने के लिए प्रशिक्षित स्वयंसेवकों की सहायता महत्वपूर्ण होगी।
सुरक्षा के साथ चिकित्सा दल भी रहेगा मौजूद
विशेष दर्शन के दौरान दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की योजना है। व्यवस्था के दौरान पुलिसकर्मियों के साथ चिकित्सा दल भी तैनात रहेगा, ताकि जरूरत पड़ने पर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
भीड़ वाले दिनों में नहीं मिलेगी विशेष सुविधा
जिला कलेक्टर एवं श्रीमंदिर के उप मुख्य प्रशासक दिव्यज्योति परिड़ा की अध्यक्षता में हुई बैठक में इस व्यवस्था से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। जानकारी के अनुसार विशेष नीतिकांतियों और अत्यधिक भीड़ वाले दिनों में दिव्यांग भक्तों को विशेष दर्शन की सुविधा नहीं दी जाएगी।
किन तिथियों पर विशेष दर्शन उपलब्ध होगा, इसका निर्णय मंदिर की धार्मिक नीतियों, कार्यक्रमों और संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए किया जाएगा।
विशेष समिति तय करेगी दर्शन की तारीख
दिव्यांग भक्तों के विशेष दर्शन के लिए उपयुक्त तिथियां तय करने के लिए समिति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। इसमें कमांडर, वरिष्ठ सेवायत और श्रीमंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य शामिल होंगे।
श्रद्धालुओं के चयन में निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन किया जाएगा। इसका उद्देश्य पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और व्यवस्थित रखना है।
| प्रतिदिन संख्या | 20 दिव्यांग भक्त |
|---|---|
| बुकिंग | ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग |
| सुविधा की सीमा | एक भक्त छह महीने में एक बार |
| मंदिर तक परिवहन | बैटरी चालित वाहन की व्यवस्था |
| प्रवेश | उत्तर द्वार के पास रैंप के जरिए |
| सहायता | स्वयंसेवक, पुलिसकर्मी और चिकित्सा दल |
| संभावित शुरुआत | कार्तिक मास के बाद |
दर्शन के बाद दिव्यांग भक्तों को मिलेगा उपहार
श्रीमंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य जगन्नाथ पूजापंडा सामंत के अनुसार विशेष दर्शन के बाद लौटने वाले दिव्यांग श्रद्धालुओं को उपहार देने की भी व्यवस्था की जाएगी। इससे महाप्रभु के दर्शन का अनुभव भक्तों के लिए और भी यादगार बन सकेगा।
वेबसाइट तैयार होने के बाद ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद पात्र श्रद्धालु निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार विशेष दर्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे।
कार्तिक मास के बाद शुरू हो सकती है सुविधा
फिलहाल विशेष दर्शन व्यवस्था को लागू करने की तैयारियां की जा रही हैं। इसके लिए अलग वेबसाइट तैयार होने के बाद ऑनलाइन पंजीकरण शुरू होगा। संभावना जताई गई है कि कार्तिक मास के बाद इसे प्रायोगिक रूप से लागू किया जा सकता है।
ऑनलाइन स्लॉट, बैटरी चालित वाहन, रैंप, व्हीलचेयर, स्वयंसेवकों की सहायता, पुलिस सुरक्षा और चिकित्सा दल जैसी सुविधाओं को एक साथ जोड़ने का प्रयास दिव्यांग भक्तों के लिए महाप्रभु श्रीजगन्नाथ के दर्शन को अधिक सुविधाजनक बना सकता है।
व्यवस्था सफल होने पर यह धार्मिक स्थलों को अधिक सुगम और समावेशी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
