कांवड़ मेले के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए कार सेवा अभियान | संत समाज का बड़ा ऐलान
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कांवड़ मेले के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए कार सेवा अभियान, संत समाज ने किया निर्णायक संघर्ष का ऐलान

हरिद्वार में अखाड़ा परिषद की बैठक के बाद कार सेवा अभियान की तैयारी तेज, तिथि जल्द घोषित होने की संभावना

हरिद्वार। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष एवं मनसा देवी मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज (निरंजनी) ने घोषणा की है कि कांवड़ मेला समाप्त होते ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति के लिए प्रस्तावित कार सेवा अभियान की तिथि घोषित की जाएगी। इस अभियान में देशभर के साधु-संतों, अखाड़ों और धार्मिक संगठनों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने की बात कही गई। इस घोषणा के बाद श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय पर फिर से व्यापक चर्चा शुरू हो गई है।

"अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद अब संत समाज का अगला लक्ष्य श्रीकृष्ण जन्मभूमि को उसके मूल स्वरूप में स्थापित कराना है।"

हरिद्वार में हुई महत्वपूर्ण बैठक

मंगलवार को हरिद्वार स्थित निरंजनी अखाड़े में आयोजित बैठक में अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज की अध्यक्षता में विभिन्न अखाड़ों एवं धार्मिक संस्थाओं के संतों ने भाग लिया। श्री चित्रगुप्त पीठ वृंदावन-मथुरा के पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद भी विशेष रूप से उपस्थित रहे।

बैठक में श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विषय पर आगे की रणनीति, संगठनात्मक तैयारी तथा जनजागरण अभियान पर विस्तार से चर्चा की गई। संत समाज ने आंदोलन को शांतिपूर्ण और संगठित ढंग से आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

"यह केवल धार्मिक स्थल का विषय नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक पहचान से जुड़ा प्रश्न है।"

कार सेवा अभियान की तैयारी

श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने बताया कि कांवड़ मेले के समापन के तुरंत बाद कार सेवा कार्यक्रम की आधिकारिक तिथि घोषित की जाएगी। इसमें देशभर के विभिन्न अखाड़ों के आचार्य, महामंडलेश्वर, महंत और संत बड़ी संख्या में भाग लेंगे। आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए समाज के सभी वर्गों से सहयोग लेने की बात भी कही गई।

बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय

  • ✅ कांवड़ मेले के बाद कार सेवा की तिथि घोषित होगी।
  • ✅ देशभर के अखाड़ों एवं संत समाज की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
  • ✅ आंदोलन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से चलाया जाएगा।
  • ✅ समाज के सभी वर्गों से सहयोग लेने की योजना।
  • ✅ जनजागरण अभियान को व्यापक स्तर पर चलाया जाएगा।

राजनीतिक नेताओं को भी मिलेगा निमंत्रण

बैठक के दौरान श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज ने कहा कि समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव तथा कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी प्रस्तावित कार सेवा अभियान में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। उनका कहना था कि धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व के विषयों पर सभी राजनीतिक दलों को सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।

दिल्ली से मथुरा तक प्रस्तावित यात्रा

श्री चित्रगुप्त पीठाधीश्वर डॉ. स्वामी सच्चिदानंद ने जानकारी दी कि प्रस्तावित कार सेवा यात्रा नई दिल्ली स्थित भैरव मंदिर से प्रारंभ होकर श्रीकृष्ण जन्मभूमि, मथुरा तक निकाली जाएगी। यात्रा का उद्देश्य श्रद्धालुओं को जोड़ना और धार्मिक जागरूकता का संदेश देना होगा।

मुख्य बिंदु विवरण
बैठक का स्थान निरंजनी अखाड़ा, हरिद्वार
अध्यक्षता श्रीमहंत डॉ. रविंद्रपुरी महाराज
मुख्य उद्देश्य श्रीकृष्ण जन्मभूमि मुक्ति अभियान
कार सेवा कांवड़ मेले के बाद तिथि घोषित होगी
प्रस्तावित यात्रा भैरव मंदिर (नई दिल्ली) से मथुरा

न्यायालय में मामले की सुनवाई

बैठक में यह भी बताया गया कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े विभिन्न मामलों की सुनवाई न्यायालय में जारी है। संत समाज ने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया अपने निर्धारित नियमों के अनुसार आगे बढ़ रही है और अंतिम निर्णय न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में होगा। उन्होंने इस विषय पर संवैधानिक और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने की प्रतिबद्धता दोहराई।

महत्वपूर्ण सूचना: श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित कानूनी मामले विभिन्न न्यायालयों में विचाराधीन हैं। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार ही होगा।

बैठक में कौन-कौन रहे उपस्थित?

बैठक में महामंडलेश्वर स्वामी ललितानंद गिरी, महामंडलेश्वर स्वामी सत्यश्रेयानंद गिरी, श्रीमहंत रामरतन गिरी, महंत सच्चिदानंद, महंत राजगिरी सहित अनेक संत एवं महंत उपस्थित रहे। सभी ने अभियान को संगठित रूप से आगे बढ़ाने और समाज में जागरूकता फैलाने का समर्थन किया।

आने वाले दिनों में कांवड़ मेले की समाप्ति के बाद कार सेवा अभियान की तिथि और विस्तृत कार्यक्रम की घोषणा होने की संभावना है। इस विषय पर देशभर की निगाहें रहेंगी। वहीं, श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़े मामलों का अंतिम निर्णय न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार ही होगा। धार्मिक गतिविधियों, सामाजिक प्रतिक्रियाओं और न्यायिक प्रक्रिया के बीच इस विषय का आगे का घटनाक्रम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।