क्या राम मंदिर ट्रस्ट की कमान संभालेंगे नृपेंद्र मिश्रा
अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में बड़े बदलाव की चर्चाएं तेज हो गई हैं। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के पद छोड़ने की आधिकारिक पुष्टि के बाद अब सबकी नजर 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की अहम बैठक पर टिकी हुई है। माना जा रहा है कि इस बैठक में ट्रस्ट के नए प्रशासनिक ढांचे, संचालन व्यवस्था और नए पदाधिकारियों को लेकर महत्वपूर्ण फैसले लिए जा सकते हैं।इसी बीच जिस नाम की सबसे अधिक चर्चा हो रही है, वह है देश के वरिष्ठ पूर्व आईएएस अधिकारी और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रस्ट के बेहतर संचालन और आधुनिक प्रबंधन व्यवस्था को लागू करने के लिए उन्हें महासचिव या फिर पहली बार बनाए जाने वाले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है।हालांकि अभी तक ट्रस्ट की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन नृपेंद्र मिश्रा का प्रशासनिक अनुभव, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनका लंबा कार्यकाल और राम मंदिर निर्माण में उनकी अहम भूमिका उन्हें इस दौड़ का सबसे मजबूत दावेदार बना रही है।
क्यों करते हैं प्रधानमंत्री मोदी उन पर इतना भरोसा?
साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी पहली बार देश के प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने दिल्ली की नौकरशाही को संभालने के लिए नृपेंद्र मिश्रा को अपना प्रधान सचिव (Principal Secretary to PM) नियुक्त किया।दिलचस्प बात यह रही कि उस समय TRAI Act के अनुसार ट्राई के पूर्व अध्यक्ष किसी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं हो सकते थे। ऐसे में मोदी सरकार ने कानून में संशोधन किया ताकि नृपेंद्र मिश्रा प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) का हिस्सा बन सकें।यह फैसला इस बात का संकेत था कि प्रधानमंत्री मोदी उनके अनुभव और प्रशासनिक क्षमता पर कितना भरोसा करते हैं।2019 में दूसरी बार सरकार बनने के बाद भी उन्हें इसी पद पर बनाए रखा गया। बाद में उन्होंने स्वयं इस पद से इस्तीफा दिया, लेकिन इसके बाद भी सरकार ने उन्हें कई अहम जिम्मेदारियां सौंपीं।
कौन हैं नृपेंद्र मिश्रा?
नृपेंद्र मिश्रा भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के 1967 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी रहे हैं। उनका जन्म 8 मार्च 1945 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कसली गांव में हुआ था।उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से केमिस्ट्री, पॉलिटिकल साइंस और पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में पोस्ट ग्रेजुएशन किया। इसके बाद उन्होंने दुनिया के प्रतिष्ठित हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के जॉन एफ. कैनेडी स्कूल ऑफ गवर्नमेंट से मास्टर ऑफ पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन (MPA) की डिग्री भी प्राप्त की।अपनी प्रशासनिक क्षमता, शांत कार्यशैली और निर्णय लेने की योग्यता के कारण वे देश के सबसे प्रभावशाली नौकरशाहों में गिने जाते रहे हैं।
प्रशासनिक करियर में निभाईं कई बड़ी जिम्मेदारियां
सरकारी सेवा के दौरान नृपेंद्र मिश्रा ने उत्तर प्रदेश सरकार और केंद्र सरकार दोनों में कई महत्वपूर्ण पदों पर काम किया।उन्होंने भारत सरकार में—टेलीकॉम सचिवउर्वरक (Fertilizer), सचिवदूरसंचार, नियामक प्राधिकरण (TRAI) के अध्यक्ष,जैसे बेहद महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी संभाली।उनके नेतृत्व में दूरसंचार क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लिए गए, जिनका असर आज भी भारतीय टेलीकॉम सेक्टर में देखा जा सकता है।
राम मंदिर निर्माण में क्या रही भूमिका?
सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद जब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन हुआ, तब फरवरी 2020 में नृपेंद्र मिश्रा को राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया।उन्होंने—
- मंदिर निर्माण की तकनीकी निगरानी
- निर्माण एजेंसियों के बीच समन्वय
- समयबद्ध कार्य योजना
- गुणवत्ता नियंत्रण
- इंजीनियरिंग संबंधी निर्णय
जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं।राम मंदिर के निर्माण कार्य को तय समय पर पूरा कराने में उनकी भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी अनुभव के कारण अब उन्हें ट्रस्ट के प्रशासनिक नेतृत्व की जिम्मेदारी देने की चर्चा हो रही है।
क्या बन सकते हैं राम मंदिर ट्रस्ट के नए महासचिव या CEO?
सूत्रों के अनुसार ट्रस्ट अब अपने संचालन को और अधिक पेशेवर एवं आधुनिक बनाना चाहता है। इसी उद्देश्य से पहली बार Chief Executive Officer (CEO) जैसा पद बनाए जाने पर भी विचार हो रहा है।मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महासचिव पद के लिए मुख्य रूप से तीन नाम सामने आए हैं—
- नृपेंद्र मिश्रा
- स्वामी गोविंददेव गिरि
- कृष्णमोहन
- कुछ सूत्रों का कहना है कि संघ परिवार चाहता है कि महासचिव का पद संगठन के पूर्णकालिक कार्यकर्ता के पास रहे, जबकि नृपेंद्र मिश्रा को उनके प्रशासनिक अनुभव के आधार पर CEO जैसी नई और शक्तिशाली जिम्मेदारी दी जा सकती है।हालांकि अभी तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
नृपेंद्र मिश्रा देश के उन चुनिंदा नौकरशाहों में शामिल हैं जिन्होंने प्रशासन, नीति निर्माण और बड़े राष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स में अपनी अलग पहचान बनाई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे भरोसेमंद अधिकारियों में उनकी गिनती होती रही है। राम मंदिर निर्माण में उनकी सफल भूमिका के कारण अब उनका नाम ट्रस्ट के शीर्ष प्रशासनिक पदों के लिए चर्चा में है।हालांकि फिलहाल उनकी नियुक्ति को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में पूरे देश की नजरें टिकी हुई हैं। इसी बैठक के बाद स्पष्ट होगा कि क्या राम मंदिर ट्रस्ट की नई कमान नृपेंद्र मिश्रा के हाथों में जाएगी या फिर कोई दूसरा नाम सामने आएगा। आने वाला फैसला न केवल ट्रस्ट के भविष्य बल्कि राम मंदिर के प्रशासनिक मॉडल के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
